कुरुक्षेत्र। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में भाजपा और जजपा का गठबंधन सरकार चलाने के लिए किया गया है, न कि चुनाव लड़ने के लिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में गठबंधन से भाजपा को बड़ा नुकसान होगा। वहीं एक देश, एक चुनाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह इसके पक्ष में नहीं हैं। कारण कि इससे संघीय ढांचे को नुकसान होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह रविवार को यादव धर्मशाला में मेरी आवाज सुनो कार्यक्रम के तहत अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं संग संवाद करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से भी बात की।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पिछले नौ वर्षों से सत्ता में है और अब इस स्थिति में पहुंच चुकी है कि किसी भी चुनाव में गठबंधन की जरूरत नहीं है। पार्टी में इतने समय में बड़ा बदलाव आया है। भाजपा का चुनाव के लिए गठबंधन किसी भी स्तर पर न्याय संगत नहीं होगा। इसके बावजूद अगर भाजपा ने जजपा से गठबंधन किया तो पार्टी को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी आगामी चुनाव को लेकर क्या रणनीति रहेगी, इसका खुलासा दो अक्तूबर को ही होगा। इस दिन जींद में प्रदेश स्तरीय बड़ी जनसभा होगी और लोग खुद चर्चा करेंगे। इसके लिए वे हर जिले में कार्यकर्ताओं को आमंत्रित कर रहे हैं। एक देश एक चुनाव पर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि फिलहाल पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई है। अभी इस कमेटी को लोकसभा और विधानसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कमेटी क्या रिपोर्ट देती हैं, यह देखना होगा। अभी कमेटी आम लोगों से लेकर राजनीतिक पार्टियों में हर वर्ग के लोगों से चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वे एक देश एक चुनाव पर सहमत नहीं है, लेकिन इसके कई फायदे भी हैं। इससे जहां बड़े स्तर पर देश व प्रदेश का खर्च बचेगा। वहीं बार-बार लगने वाली आचार संहिताओं से भी छुटकारा मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि उचाना विधानसभा क्षेत्र से इस बार चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन यहां से वे पांच बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा एक बार पत्नी भी विधायक रही है।
दो को निकलेगा पुरानी समस्याओं का नया समाधान : वीरेंद्र
वीरेंद्र सिंह ने मेरी आवाज सुनो कार्यक्रम के दौरान संबोधन में कहा कि दो अक्तूबर को होने वाली जनसभा से उन्हें उम्मीद है कि पुरानी समस्याओं का कुछ न कुछ नया समाधान अवश्य निकलेगा। देश को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं तो हरियाणा बने 56 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, असमानता, भेदभाव जैसी समस्याएं ज्यों की त्यों है। इतने वर्षों में सरकारों ने भरसक प्रयास किए, लेकिन आज तक भी पूरे परिणाम नहीं मिल पाए हैं। गरीब पीस रहा है तो बेरोजगार युवा विदेशों की ओर रुख कर रहा है। किसान की फसल के दाम भी उम्मीद अनुसार नही बढ़ पाए हैं। न ही वे कर्ज से मुक्त हुए। अब समय आ गया है कि इन समस्याओं से छुटकारा मिले।