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पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी पर बैन को बच्चों सराहा

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पर्यावरण प्रदूषण से कोरोना संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने दीवाली से पहले पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीएम मनोहर लाल ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि दिवाली का त्योहार सादगीपूर्ण तरीके से मनाना चाहिए और पटाखे नहीं जलाने चाहिए। सरकार के इस निर्णय का सभी वर्ग ने स्वागत किया है। वहीं, बच्चे भी सरकार के इस फैसले की सराहना कर रहे हैं। पटाखा और प्रदूषण रहित दिवाली मनाने को लेकर अमर उजाला एक युद्ध पटाखों के विरूद्ध अभियान चलाए हुए है। इस अभियान सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं सहित विभिन्न वर्ग के लोग जुड़कर पटाखे न जलाने के अपील कर रहे हैं। अब सरकार ने दीवाली से राज्य में पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी पर बैन लगा दिया है, जिसे लेकर आज अमर उजाला ने बच्चों से बातचीत की। बच्चों ने बताया कि पटाखों जलाने से पैसों की बर्बादी होती है। इससे अच्छा है कि इस पैसे से किसी जरूरतमंद की मदद जाए।
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पटाखों से पैसे और समय दोनों की बर्बादी : भुवन
भुवन ने बताया कि पटाखे जलाने से पर्यावरण प्रदूषण होता है, जिससे कई तरह की बीमारियां फैलती है। वह पहले से ही पटाखे नहीं जलाते हैं, बल्कि पटाखों पर खर्च होने वाले पैसों को पाठ्य सामग्री लेने के लिए इस्तेमाल करते हैं। पटाखे जलाने से पैसे के साथ-साथ समय की भी बर्बादी होती है।
सरकार ने लिया सही फैसला : ध्रुव
11वीं कक्षा के छात्र ध्रुव ने बताया कि सरकार ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगाकर सही फैसला लिया है। आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से त्राही-त्राही कर रही है। ऐसे में दीवाली पर पटाखे जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होगा, जिससे कोरोना महामारी के खतरे की संभावना बढ़ जाएगी। कोरोना से हुए लॉकडाउन का असर सबसे ज्यादा छात्र वर्ग पर पड़ा है। छात्रों का लगभग एक पूरा साल खराब हो गया है। इसलिए हमें अपने भविष्य व स्वास्थ्य को देखते हुए पटाखे नहीं जलाने चाहिए।
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