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पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर होगी बीएएमएस परीक्षा

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श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय की इमारत। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। बीएएमएस कर रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। इस सत्र से परीक्षाएं पुरानी पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। विद्यार्थियों को हर वर्ष की बजाय डेढ़ साल में एक बार मुख्य परीक्षा देनी होगी। प्रश्नपत्र का पैटर्न भी पूरे देश में एक जैसा होगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों का स्टाइपेंड व अध्यापकों का वेतनमान एमबीबीएस के समकक्ष दिया जाएगा। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग की केंद्रीय कमेटी ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय से संबंधित सभी महाविद्यालयों में सत्र 2022-23 के लिए विद्यार्थियों का दाखिला भी इसी पाठ्यक्रम के आधार पर किया जा रहा है। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय की बुधवार को अंडर ग्रेजुएट बोर्ड ऑफ स्टडीज व फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद की हुई बैठक में नई प्रक्रिया को लागू किया गया है। अंडर ग्रेजुएट बोर्ड ऑफ स्टडीज व फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद की डीन प्रो. दीप्ति पराशर ने बताया कि बीएएमएस 10 साल बाद अपनी पुरानी पारंपरिक पाठ्यक्रम प्रणाली पर लौट आई है।
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डेढ़-डेढ़ वर्ष के तीन प्रोफेशनल होंगे और एक वर्ष की इंटर्नशिप रहेगी, जिसमें विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा हर साल की बजाए अब डेढ़ साल में एक बार देनी होगी। प्रश्नपत्र का पैटर्न भी पूरे देश में एक जैसा होगा। यह परिवर्तन हर 10 साल बाद आयोग द्वारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम के अलावा विद्यार्थियों को नौ अतिरिक्त ऐच्छिक विषयों में परीक्षाएं देनी होंगी। हर प्रोफेशनल वर्ष में तीन-तीन ऐच्छिक विषयों को लेना होगा। इनके ग्रेड हर वर्ष जुड़ेंगे। इन विषयों की ऑनलाइन 45 घंटे कक्षा लगानी होगी।
इस बार नए विद्यार्थियों के लिए प्रथम प्रोफेशनल में 15 दिन का प्रस्तावना कार्यक्रम चलाया जाएगा, जो संस्कृति और आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों पर आधारित रहेगा। इसके अलावा डेढ़ वर्ष में विद्यार्थियों को 320 दिन का वर्किंग डे रहेंगे। इमरजेंसी मेडिसिन के बारे में अलग से विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा। परीक्षा में 40 प्रतिशत प्रश्न बड़े, 40 प्रतिशत छोटे और 20 प्रतिशत ऑब्जेक्टिव होंगे। इस अवसर पर आयुर्वेदिक महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कटारिया नेअधिसूचना से जुड़े सदस्यों की शंकाओं को दूर किया और कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सक अन्य पद्धति के चिकित्सकों से कम नहीं हैं। कोरोना काल के बाद लोगों का आयुर्वेद की ओर रुझान बढ़ा है।
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग की केंद्रीय कमेटी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सक को इंटर्नशिप के दौरान एमबीबीएस के विद्यार्थियों के समान स्टाइपेंड दिया जाएगा। इसके साथ ही आयुर्वेदिक महाविद्यालय में भावी चिकित्सक तैयार कर रहे शिक्षकों को मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों के समान वेतनमान दिया जाएगा।
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10 साल बाद किया जाता है पद्धति में परिवर्तन
वर्ष 2012 से पहले बीएएमएस प्रोफेशनल डेढ़-डेढ़ वर्ष के तीन होते थे। हर डेढ़ साल में एक बार परीक्षाएं होती थी। साढ़े चार साल की बीएएमएस होने के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी जरूरी थी। इसके बाद वर्ष 2012 में भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद की ओर से बीएएमएस को एमबीबीएस की तर्ज पर प्रत्येक वर्ष में चार बार परीक्षाएं लेने के आदेश जारी कर दिए गए थे। इसके बाद एक-एक वर्ष के तीन और डेढ़ साल का एक बीएएमएस प्रोफेशनल होने लगा। मगर अब केंद्रीय कमेटी द्वारा पुरानी पद्धति को दोबारा लागू करने के आदेश पूरे भारत में जारी कर दिए हैं। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय ने भी इसे लागू कर दिया है।
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