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आशा वर्कर्स ने भी काले दुपट्टे ओढ़कर मासूमों को पिलाई पोलियो रोधी दवा

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आशा वर्कर्स और स्वयंसेवकों की टीमों ने मंगलवार को काले दुपट्टे ओढ़कर पोलियो रोधी दवा लेने से वंचित रहे बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ रोष भी जताया।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पहले दिन जिले में 68 हजार 494 मासूमों को पोलियो की खुराक पिलाई गई। इसके अलावा वंचित बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए टीमें गठित की गई। इन टीमों ने जिले के एक लाख 22 हजार से अधिक घरों में दस्तक दी। उन्होंने सोमवार को 21 हजार 516 और मंगलवार को 12 हजार 729 सहित कुल एक लाख दो हजार 729 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई।
स्वास्थ्य विभाग ने पोलियो राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर 28 फरवरी से कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान शुरू किया था। विभाग ने मंगलवार तक अभियान के तीन दिनों में जिलेभर के 0-5 वर्ष के सौ फीसदी मासूमों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। वहीं सरकार के खिलाफ कामकाज बंद करके हड़ताल पर चल रही आंगनबाड़ी वर्कर्स ने दवा न पिलाने का ऐलान कर दिया था। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आशा वर्कर्स और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों सहित स्वयंसेवकों का सहारा लेना पड़ा लेकिन आशा वर्कर्स भी सरकार की अनदेखी से नाराज नजर आई। उन्होंने काली चुन्नी और दुपट्टे ओढ़कर सरकार की अनदेखी के खिलाफ रोष जताया। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की राज्य उप प्रधान रानी देवी, जिला प्रधान पिंकी देवी और जिला सचिव कुसुम ने बताया कि सरकार उनकी लंबित मांगों की लगातार अनदेखी करती आ रही है। सरकार की ओर से कोरोना काल में आशा वर्कर्स को एक हजार रुपये जोखिम भत्ता दिया जा रहा था लेकिन पांच माह यह भत्ता देने के बाद फिर बंद कर दिया गया। इसके अलावा उन्हें आठ अलग-अलग गतिविधियों का भत्ता दिया जा रहा था लेकिन इसमें से भी 50 फीसदी भत्ता काट लिया। वहीं 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करते हुए आशा वर्कर्स को पक्का करने सहित अन्य कई लंबित मांगें पड़ी है
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