कुरुक्षेत्र। सूदक काल शुरू होने पर श्री कालेश्वर महादेव मंदिर के कपाट बंद करने के दौरान पुजारी।
कुरुक्षेत्र। पितृ पक्ष की शुरुआत के पहले दिन ही इस वर्ष का पहला चंद्रग्रहण लगने से विशेष सतर्कता बरती गई। रविवार रात नौ बजकर 58 मिनट पर चंद्रग्रहण आरंभ हुआ, जो रात एक बजकर 26 मिनट तक चला।
ग्रहण के नौ घंटे पहले यानी दोपहर 12 बजकर 58 मिनट से सूतक काल शुरू हो गया। सूतक लगने के साथ ही जिले के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। इस अवधि में धार्मिक आयोजन भी स्थगित कर दिए गए। पंडित राकेश कुमार ने बताया कि ग्रहण शुरू होने से पहले ही विधिवत शुद्धि प्रक्रिया पूरी की गई और कपाट बंद कर दिए गए। ज्योतिसर, भद्रकाली मंदिर, गीता मंदिर, लक्ष्मी नारायण, कालेश्वर महादेव, स्थानेश्वर महादेव समेत सभी बड़े मंदिरों के कपाट बंंद कर दिए गए। ग्रहण के कारण इस बार पितृ पक्ष के पहले दिन श्राद्ध और तर्पण का समय बेहद सीमित रहा। जिन परिवारों को पूर्णिमा तिथि पर पितरों का श्राद्ध करना था, उन्होंने दोपहर 12 बजकर 58 मिनट से पहले ही तर्पण, दान और पूजा-पाठ संपन्न कर लिए। सूतक काल शुरू होने के बाद सभी धार्मिक क्रियाएं पूरी तरह वर्जित रहीं। लोगों ने रात में चंद्रमा के दर्शन कर घरों में ईश्वर को याद किया।