संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अमरिंदर शर्मा की अदालत ने 43 साल पुराने भूमि विवाद मामले में फैसला सुनाया है। 25 फरवरी 1982 के निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए रणजीत सिंह और अन्य की अपील स्वीकार कर ली गई।
मामला बान गांव में स्थित एक बीघा 17 बिस्वा जमीन से संबंधित है। मामले के मुताबिक अस्सी और उनके उत्तराधिकारियों ने दावा किया कि उनके पति मुकंदा 1960-61 से पहले जमीन के मालिक और काबिज थे। 1971-72 में समेकन (कंसॉलिडेशन) के दौरान यह जमीन उन्हें आवंटित हुई थी लेकिन रणजीत सिंह और अन्य ने कथित तौर पर राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर जबरन कब्जा कर लिया।
निचली अदालत ने अस्सी के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ रणजीत सिंह और अन्य ने अपील दायर की। अतिरिक्त जिला जज अमरिंदर शर्मा ने शनिवार को दिए फैसले में कहा कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का गलत मूल्यांकन किया। वादी अस्सी और अन्य अपने दावे को साबित करने में विफल रहे।
उनके पास समेकन रिकॉर्ड या राजस्व अधिकारियों की गवाही जैसे ठोस सबूत नहीं थे। इसके विपरीत अपीलकर्ताओं रणजीत सिंह के उत्तराधिकारियों के पक्ष में 1972 से राजस्व रिकॉर्ड में कब्जे के प्रविष्टियां थीं। अदालत ने माना कि वादी को अपने दावे के लिए मजबूत सबूत पेश करने चाहिए थे, न कि प्रतिवादी की कमजोरियों पर निर्भर रहना चाहिए था। अदालत ने यह भी नोट किया कि वादी ने राजस्व अधिकारियों पर साठगांठ का आरोप लगाया, लेकिन इसके समर्थन में कोई सबूत या अधिकारी को पक्षकार नहीं बनाया।
इस कमी ने उनके दावे को कमजोर किया। इसके अलावा प्रतिवादियों का प्रतिकूल कब्जे (एडवर्स पजेशन) का दावा भी अस्पष्ट रहा, लेकिन यह वादी के पक्ष को मजबूत नहीं करता। अंत में अपील स्वीकार करते हुए 1982 का फैसला रद्द कर दिया गया।