नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश सरकार भले ही आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में संचालित करने का दम भर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर हैं। हालात ऐसे हैं कि ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र एक-एक कमरों में चलाए जा रहे हैं। यहां बच्चों का खेलना-कूदना तो दूर बैठने में भी अच्छे से व्यवस्था नहीं है। कोरोना संक्रमण के बाद फिर से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में औसतन 18 से 22 बच्चे रोजाना पहुंच रहे हैं। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा दिए जा रहे मासिक किराया बताया जा रहा है। बुधवार को आजाद नगर, दीदार नगर और दर्रा खेड़ा स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति जांची। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एक-एक कमरे में केंद्र चलाने को मजबूर हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में किराए के नाम पर 200 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1500 रुपये सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं।
यही नहीं, ज्यादातर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से बिजली के बिल का भुगतान करना पड़ रहा है।
यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि कमरे में किराए के नाम पर शहरी क्षेत्र में मात्र 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। इतने किराए में आंगनबाड़ी केंद्र लायक जगह मिलनी तो दूर एक कमरा तक किराए पर नहीं मिलता। कार्यकर्ताओं ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में 750 रुपये किराया देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मात्र 200 रुपये में केंद्र चला रही हैं। ऐसे में भला कैसे आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी स्कूल चल सकते हैं।
सरकार न वेतन में कर रही बढ़ोत्तरी और न केंद्रों के किराए में : कलावती सैन
आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की राज्य प्रधान कलावती सैन का कहना है कि सरकार न तो आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर के वेतन में बढ़ोत्तरी कर रही और न ही आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए में। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र चलाने काफी मुश्किल हो रहा हैं। केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की 1500 रुपये और हेल्पर की 750 रुपये वेतन बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं दिया। इसके अलावा वे लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया 4 हजार रुपये देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार अनदेखी कर रही हैं। कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खुद बिजली के बिल का भुगतान करना पड़ रहा है। इन्हीं मांगों को लेकर वे कई बार प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप चुके हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में 750 और शहरी क्षेत्र में दिए जा रहे हैं 1500 रुपये किराया : नीतू रानी
जिला कार्यक्रम अधिकारी नीतू रानी का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का ग्रामीण क्षेत्र में 750 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1500 रुपये किराया प्रतिमाह दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र शुरू करने के लिए 1500 रुपये में जगह मिलना काफी मुश्किल होता है, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता किसी न किसी तरह फिर भी केंद्र चल रही हैं। शहरी क्षेत्र में कई सामुदायिक केंद्रों और धर्मशालाओं में आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं।