कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप गुप्ता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कृषि शोध परियोजना के लिए 18 लाख रुपये का शोध अनुदान मिला है। हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल ने हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड (एचएसआरएफ) के तहत यह अनुदान गेहूं में लीफ रस्ट रोग की समय रहते पहचान करने वाला एआई मॉडल विकसित करने के लिए स्वीकृत किया है।
इस परियोजना के तहत एआई, रिमोट सेंसिंग और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक की मदद से गेहूं की फसल में लीफ रस्ट रोग का शुरुआती चरण में पता लगाया जाएगा। इससे किसानों को समय रहते रोग नियंत्रण के उपाय करने में मदद मिलेगी और फसल उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ेगी।
केयू के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने डॉ. संदीप गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुदान विश्वविद्यालय की शोध क्षमता और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ती पहचान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के निष्कर्ष कृषि और पर्यावरण दोनों क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित होंगे। पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने कहा कि डॉ. संदीप गुप्ता का रिमोट सेंसिंग, जियोस्पेशियल तकनीक, इमेज प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में कार्य संस्थान के शोध को नई दिशा दे रहा है। लाइफ साइंस संकाय के डीन प्रो. जसबीर सिंह ने कहा कि बाहरी वित्तपोषित शोध परियोजनाएं विश्वविद्यालय में अनुसंधान और अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देती हैं।
डॉ. संदीप गुप्ता ने जर्मनी के अल्बर्ट-लुडविग्स विश्वविद्यालय से रिमोट सेंसिंग में पीएचडी की है। वर्तमान में उनके निर्देशन में एआई आधारित गेहूं में लीफ रस्ट रोग की पहचान, वैश्विक वाइल्डफायर से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, कुरुक्षेत्र के शहरी विस्तार और हरियाणा व अरुणाचल प्रदेश के वनों में हो रहे बदलावों पर भी शोध कार्य चल रहा है।
किसानों को कैसे होगा फायदा
- एआई तकनीक से गेहूं में लीफ रस्ट रोग की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव होगी।
- समय रहते रोग नियंत्रण के उपाय किए जा सकेंगे।
- फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- प्रिसीजन एग्रीकल्चर (सटीक कृषि) को बढ़ावा मिलेगा।
- किसानों को नुकसान कम करने में सहायता मिलेगी।