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डीएपी के लिए मारामारी, अधिकारी बोले- खाद की नहीं कमी

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डीएपी खाद को लेकर किसानों के बीच मारामारी की नौबत आ चुकी है। भनक लगते ही किसान डीएपी लेने के लिए पहुंच जाते है। किसानों को कहना है कि जिले में डीएपी की कमी है जबकि अधिकारियों का कहना है कि खाद की कोई कमी नहीं है। यहां शुक्रवार को जैसे ही डीएपी आने की भनक किसानों को लगी वे खाद विक्रेताओं की दुकानों पर किसानों की लंबी-लंबी लाइन लग गई। खाद लेने के चक्कर में कई किसानों की आपस में कई बार कहासुनी भी हुई। यहां चार खाद विक्रेताओं के पास डीएपी के 500 कट्टे आए थे जो कुछ ही देर में बिक गए। खाद विक्रेता श्याम लाल सिंगला का कहना है कि उन्होंने डीएपी के लिए डिस्ट्रीब्यूटर को सितंबर में एक गाड़ी की पेमेंट जमा कराई थी। एक माह से भी लंबे अंतराल के बाद उन्हें डीएपी खाद मिली। वह भी 500 कट्टों में से मात्र 150 कट्टे ही मिले थे। इसे किसानों में वितरण करने में उन्हें भारी समस्या का सामना करना पड़ा। किसान सोमनाथ, धर्मपाल, विरेंद्र आदि का कहना है कि सरकार किसानों को जानबूझकर परेशान कर रही है। अब आलू और गेहूं की बिजाई का सीजन चल रहा हैं। किसान पिछले एक माह से भी ज्यादा समय से डीएपी के लिए परेशान है। जब फसल बिजाई के समय ही किसानों को खाद नहीं मिलेगा तो बाद में खाद आने पर किसान खाद का क्या करेगा। किसानों ने सरकार से डीएपी को लेकर स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की है ताकि किसानों को सही समय पर बिना परेशान हुए खाद मिल सकें।
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कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी डॉ. जितेंद्र मेहता व उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. शशी पाल शर्मा ने बताया कि डीएपी खाद की कोई कमी नहीं है। किसान अपनी जरूरत के हिसाब से ही खाद खरीदे व बेवजह खाद को स्टाक न करें। बाबैन में 400 बैग डीएपी खाद आया है और जल्दी ही डीएपी खाद के रैक लगने है, जिसके बाद खाद की कोई कमी नहीं रहेगी।
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