कुरुक्षेत्र। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे समीकरण भी दिलचस्प हो रहे हैं। जहां प्रत्याशियों ने प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंकी हुई है तो वहीं, मतदाताओं में भी अब प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। थानेसर का रण अब काफी अहम होता जा रहा है। साल 1967 से अब तक हुए थानेसर के रण में कांग्रेस ने 14 चुनावों में से पांच बार जीत दर्ज की है। जबकि छह बार दूसरे स्थान पर भी रही हैं।
भाजपा, लोकदल व इनेलो ने भी दो-दो बार थानेसर के रण में फतेह हासिल की है। जनता पार्टी, जनता दल और समता पार्टी ने भी एक-एक बार जीत हासिल कर सता में भागीदारी पाई है। हालांकि थानेसर के रण में अभी तक आजाद उम्मीदवार पर मतदाताओं ने भरोसा नहीं जताया जिससे अभी तक किसी भी आजाद उम्मीदवार का खाता नहीं खुल पाया है जबकि साल 1996 में आजाद उम्मीदवार ने दूसरे स्थान पर रहते हुए समता पार्टी के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर भी दी थी।
इस बार हो रहे थानेसर के रण में जहां भाजपा तीसरी बार कमल खिलाने का प्रयास कर रही हैं तो वहीं कांग्रेस भी 14 साल पहले हुए वनवास को खत्म कर सत्ता में भागेदारी हासिल करने के लिए मैदान में दिनरात जुटी हैं। हालांकि दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरी आप पार्टी भी अपनी सियासी जमीन को तैयार करने में जुटी है।
अब तक कब-कब किसे मिली जीत
कांग्रेस1967, 1968, 1972, 1991, 2005
भाजपा-2014, 2019
इनेलो2000, 2009
लोकदल-1982, 1987
जनता पार्टी-1977
जनता दल-1990
समता पार्टी1996
कब कौन रहा दूसरे स्थान पर
कांग्रेस-1977, 1982, 1987, 2000, 2009, 2019
एबीजेएस-1967, 1968, 1972
इनेलो2005, 2014
साल 1996 में आजाद उम्मीदवार भी रहा था दूसरे स्थान पर
थानेसर के रण में साल 1996 में हुए चुनाव के दौरान समता पार्टी के अशोक कुमार अरोड़ा ने 25 हजार 175 वोट हासिल किए, जबकि उनके मुकाबले में चुनाव लड़ रहे आजाद उम्मीदवार रमेश कुमार को 20 हजार 200 वोट मिले और वे चार हजार नौ सौ 75 वोटों से चुनाव हार गए। हांलाकि हरियाणा विकास पार्टी से चुनाव लड़ रहे साहब सिंह 17 हजार छह सौ 40 वोट लेकर तीसरे और कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे पवन गर्ग 12 हजार छह सौ 26 वोट हासिल कर चौथे स्थान पर रहे।