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सरस्वती नदी के किनारे पर स्थित किले से मिले 6 प्राचीनसिक्के

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देश की प्राचीन एवं पवित्र सरस्वती नदी के किनारे स्थित यमुनानगर के गांव संधाया के एक ग्रामीण बलविंद्र सिंह को यहां पर स्थित किले से प्राचीन काल के 6 सिक्के मिले हैं। उसने सिक्कों को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड को सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि इस किले से पहले भी कई तरह का प्राचीन सामान मिल चुका है। सिक्कों को देख कर फिलहाल अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये सिक्के हडप्पा कालीन या फिर सरस्वती प्राचीन सभ्यता काल के हो सकते हैं। इन सिक्कों का काल जानने के लिए हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने पुरातत्व विभाग हरियाणा को पत्र लिखा है। पुरातत्व विभाग की टीम जांच करने के बाद ही इन सिक्कों का सही काल पता लगा पाएगी।
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बता दें कि इस नदी के किनारे आदिबद्री से लेकर हरियाणा राजस्थान की सीमा तक दर्जनों प्राचीन जगह हैं। इनमें भगवान पुरा, पिहोवा, कपिल मुनि मंदिर कैथल, राखीगढ़ी, बनावाली आदि शामिल हैं। अब गांव संधाया में सिक्कों के मिलने के बाद इस जगह को ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाएगा। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह का कहना है कि अगर इस जगह की खुदाई की जाए तो इस जगह पर इतिहास से जुड़ी कुछ अन्य बातों का पता चल सकता है।
नदी के किनारे प्राचीन समय में बसते थे लोग: धुम्मन
ग्रामीण बलविंद्र सिंह की ओर से सिक्के मिलने की सूचना देने पर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच शनिवार को प्राचीन किले का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान बलविंद्र सिंह ने प्राचीन किले से मिले 6 सिक्के बोर्ड के उपाध्यक्ष को सौंप दिए। उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह ने कहा कि सरस्वती नदी हरियाणा की सबसे प्राचीन नदी है। इस नदी से लोगों को पीने का पानी मिलता था। इसलिए नदी के किनारे ही लोग बसते थे। इसलिए प्राचीन ग्रंथों में सरस्वती नदी को सभ्यता, शिक्षा व संस्कारों की जननी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र नदी के किनारे से सिक्कों का मिलना यह साबित करता है कि इस नदी के किनारे प्राचीन समय में लोग बसते थे।
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