लाडवा। भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को लाडवा-करनाल-यमुनानगर राज्यमार्ग पर हठयोग करके करीब एक घंटा रास्ता जाम रखा। भाकियू के सदस्य सुबह नौ बजे लाडवा-करनाल रोड पर गांव बपदा मोड़ पर इकट्ठा हुए और सड़क पर मैट बिछाकर बैठ गए। भाकियू सदस्यों ने अपनी मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लाडवा थाना प्रभारी निर्मल कुमार ने भाकियू सदस्यों को मनाने की काफी कोशिश की लेकिन वे सड़क से हटने के लिए तैयार नहीं हुए।
भाकियू के जिला प्रधान मैनपाल बूढा ने कहा कि अविलंब स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करना, किसानों की संपूर्ण कर्जामुक्ति, प्रधानमंत्री बीमा योजना को किसानों के लिए लाभकारी बनाने व किसानों को 60 साल की उम्र में रिटायर मानकर पांच लाख रुपये का भुगतान करने जैसी अनेक मांगे केंद्र सरकार तुरंत पूरी करे। भाकियू के सड़क पर हठयोग करने से वाहनों की लाइनें लगने लगी तो पुलिस ने करनाल जाने वाले दोपहिया व कार जैसे वाहनों को आसपास की गलियों से निकाला तो बसों व ट्रक-ट्रालों को पिपली जीटीरोड की ओर से करनाल के लिए निकाल कर सड़क पर जाम नहीं लगने दिया। इस अवसर पर जिला प्रधान मैनपाल बूढा, पूर्व प्रधान जयपाल नैन मुकरपुर, ब्लाक प्रधान अजित सिंह, रामकरण बूढा, मामचंद बदरपुर, मदनपाल बपदा, धर्म सिंह बपदा, शेर सिंह बडौंदा, धर्मपाल बपदी, बलबीर शर्मा व त्रिलोचन सिंह खेडी दाबदालान सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे। फोटो खिंचते ही चलते बने आंदोलनकारी किसान
भाकियू का सड़क किसान आंदोलन योग दिवस खानापूर्ति आंदोलन बनकर रह गया। यह आंदोलन निर्धारित समय से करीब आधा घंटा देरी से शुरू किया और करीब पौने घंटे बैठे इन भाकियू कार्यकर्ताओं ने मीडिया के आने के बाद फोटो खिंचवाते ही आंदोलन को खत्म कर दिया और अपने-अपने घर चले गए। जबकि भाकियू ने सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक लाडवा-इंद्री मार्ग पर बपदा मोड़ पर सड़क के बीचों-बीच बैठकर सड़क किसान आंदोलन योग दिवस बनाने की रणनीति बनाई हुई थी और इस आंदोलन में करीब 100 से अधिक किसानों के पहुंचने की उम्मीद भी थी। इस आंदोलन में किसानों व भाकियू कार्यकर्ताओं की संख्या भी नाम मात्र की ही थी। शायद इसीलिए भाकियू कार्यकर्ताओं ने अपना आंदोलन पौने घंटे में ही समेटना पड़ा।