कुरुक्षेत्र। लोक कला सांझी धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। लोक कला सांझी को बचाने के लिए विरासत हेरिटेज विलेज द्वारा आयोजित चौथे विरासत सांझी उत्सव में सांझी प्रतियोगिता का आयोजन दो अक्तूबर से किया जा रहा है। प्रतियोगिता में उत्तर भारत के जहां सांझी बनाई जाती है किसी भी राज्य की महिला भाग ले सकती है। प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए एक लाख 43 हजार सात सौ रुपये के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। उक्त जानकारी कार्यक्रम के संयोजक डॉ. महासिंह पूनिया ने दी।
उन्होंने बताया कि विरासत सांझी उत्सव में प्रथम पुरस्कार 51 हजार, दूसरा 31 हजार, तीसरा 21 हजार, चौथा 11 हजार, पांचवां 5100 रुपये, छठा पुरस्कार 3100, सातवां 2100 रुपये के पांच पुरस्कार जबकि आठवां 1100 रुपये के दस पुरस्कार रखे गए हैं। कार्यक्रम का आयोजन विरासत हेरिटेज विलेज मसाना में किया जा रहा है। सांझी लगाने की प्रक्रिया दो अक्तूबर को अमावस्या के दिन होगी, जबकि पुरस्कार वितरण एवं सांस्कृतिक समारोह का आयोजन 11 अक्तूबर शुक्रवार को दोपहर बाद चार बजे आयोजित किया जाएगा। इस सांझी उत्सव में भाग लेने वाली सभी महिलाओं एवं कलाकरों को घर से सांझी बनाकर लानी होगी। विरासत में प्रत्येक कलाकार को स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा। जिस पर वह सांझी लगाई जाएगी। सभी विजेताओं को 11 अक्तूबर को पुरस्कार वितरण किए जाएंगे। डॉ. पूनिया ने कहा कि इसी कला को बचाने के लिए विरासत में सांझी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। सांझी उत्सव के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लुप्त होती कला सांझी को बचाने के लिए समाज के सभी लोगों से आगे बढ़कर भागीदार होने के लिए आह्वान भी किया है। इस अवसर पर सबसे बड़ी सांझी भी लगाई जाएगी, जिसकी ऊंचाई 25 फुट होगी, जबकि चौड़ाई 14 फुट होगी। इससे पूर्व कभी भी इतनी बड़ी सांझी नहीं लगाई गई है।