नरेंद्र शर्मा
कुरुक्षेत्र।
केवल 140 दिनों में 1000 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने करने वाले स्वास्थ्य विभाग के पास एंटी रेबीज इंजेक्शन का टोटा है। जिले भर में स्ट्रे डॉग की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह से लोग आये दिन सड़क हादसों के अलावा आवारा कुत्तों के काटे जाने के शिकार रहे हैं। अगर जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर ही गौर किया जाये तो एक जनवरी 2018 से 21 मई 2018 तक कुत्ते काटे जाने के शिकार हुए एक हजार से अधिक लोगों का उपचार तो केवल सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ही हुआ है। हालांकि इन आंकड़ों में उन लोगों की संख्या शामिल नहीं है जिन्होंने कुत्ते द्वारा काटे जाने के बाद जिला के अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में उपचार कराया है।
बहरहाल आवारा कुत्तों के अलावा जिला के लोगों की लिये दूसरी बड़ी समस्या सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का उपलब्ध ना होना है। सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन के लिये जहां 100 रुपये लगते हैं वहीं प्राइवेट दवा बिक्री केंद्रों से यह इंजेक्शन इन्हें 350 रुपये में खरीदना पड़ता है। हद की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने इस समस्या का हल अस्पतालों में इंजेक्शन उपलब्ध कराकर नहीं बल्कि इसके विकल्प के तौर पर टिटनेस के टीके को हल बना लिया है। आर्थिक रुप से कमजोर वे लोग जो कि निजी अस्पतालों में भारी भरकम फीस देने में असमर्थ हैं ,वे ऐसा ही आधा अधूरा इलाज सरकारी अस्पतालों में कराने को विवश हैं। उल्लेखनीय है कि जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2017 के दौरान कुरुक्षेत्र में 2200 के करीब कुत्तों के काटने के मामले सामने आए थे। वहीं 2018 में 140 दिन में करीब एक हजार लोग कुत्तों के काटे जाने के शिकार हो चुके हैं। वहीं पिछले चार दिनों से एलएनजेपी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने से करीब सौ मरीजों बिना इलाज वापिस लौटने को विवश हुए हैं।
माह मरीज
जनवरी 172
फरवरी 219
मार्च 138
अप्रैल 162
21 मई तक 191
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक अधीक्षक डॉ मनजीत ने कहा कि पिछले कई दिनों से एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी पूरे प्रदेश भर में चली हुई है जल्दी ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।
नागरिक अस्पताल में उपलब्ध नहीं है एंटी रेबीज वैक्सीन
जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज वैक्सीन का टीका बीपीएल कार्ड धारक को मुफ्त व सामान्य नागरिकों को मात्र 100 रूपये में टीकाकरण किया जाता है, वहीं सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने से मरीजों को तीन गुणा दामों में बाहर से टीका खरीदने पड़ रहे हैं।
72 घंटे में इंजेक्शन जरूरी
कुत्ता काटने के तुरंत बाद ही पीड़ित को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए। अगर किसी कारण नहीं लगवा पाया तो 72 घंटे में हर हाल में एंटी रेबीज टीका लग जाना चाहिए, अन्यथा संक्रमण फैल जाता है और यह स्थिति पीड़ित के लिये घातक हो सकती है। एक टीका तीन वर्ष तक काम करता है।
एंटी रेबीज टीका जरूर लगवाएं
जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि कुत्ते या बंदर के काटे जाने पर मरीज एंटी रेबीज टीका जरूर लगवाएं। एंटी रेबीज टीका , रेबीज संक्रमण को बढ़ने से रोकता है। इसीलिए कुत्ते के काटने पर टीका लगवाना बेहद जरूरी है। रेबीज संक्रमित कुत्ते के दिमाग में वायरस होते हैं। जो लार के जरिए जीभ तक आ जाते हैं। जब वह कुत्ता किसी को काटता है तो लार के जरिए वायरस व्यक्ति के घाव वाले स्थान पर पहुंचने की संभावना रहती है।
हमारे परिवार के चार सदस्यों को कुत्ते ने काटा : बलविंद्र कौर
एलएनजेपी अस्पताल में रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए आई गांव बारवा निवासी बलविंद्र कौर ने बताया कि हमारे एक ही परिवार के चार सदस्य कुत्ते का शिकार हो चुके हैं। उनके गांव में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन लोगों के लिये जानलेवा साबित हो रहे इन आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिये कोई बंदोबस्त नहीं है।