जिंदा हूं मैं, अब नहीं कह सकेगा जौली एलएलएबी टू का सीताराम
सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाते अलविदा हो गया केयू का होनहार पुराना छात्र
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
प्रख्यात रंगकर्मी एवं बॉलीवुड एक्टर सीताराम पांचाल कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को कभी नहीं भूले पर जीवन के सबसे बुरे दौर में यूनिवर्सिटी ने उन्हें भुला दिया। आखिरकार आर्थिक तंगी की हालात में वीरवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और कॉलेज के जमाने में केयू के बेस्ट एक्टर का अवार्ड हासिल कर चुके सीताराम पांचाल उन चुनिंदा पुराने विद्यार्थियों में से एक थे, जिन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को सदैव याद रखा और समय समय पर केयू के मंच पर दिखाई देते रहे। केयू युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के एक कर्मचारी की मानें तो केयू से पासआउट होने के बाद भी पांचाल कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के मंच पर आकर नये कलाकारों को अभिनय के गुर सिखाते रहे। वे कई बार केयू के स्टेज डायरेक्टर रहे। इसके अलावा ऐसे कई अवसर आए जब उन्हें केयू की सांस्कृतिक गतिविधियों के दौरान बतौर अतिथि और निर्णायक मंडल में शामिल करने के लिए बुलाया गया। इस सबके बावजूद तीन साल के संकटकाल में केयू उनकी आर्थिक मदद के लिये कभी आगे नहीं आया। हालांकि केयू केयू के कल्चर काउंसिल फंड में करोड़ों रुपये का धन जमा है।
बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सीताराम पांचाल को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी। कैंसर से जंग में पांचाल की लगभग पूरी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी। वे सोशल मीडिया के जरिये आर्थिक सहयोग की गुहार लगा चुके थे, इसके बावजूद केयू का दिल नहीं पसीजा। हालांकि सीताराम पांचाल को सीतू भाई के नाम से पुकारने वाले कई लोग मदद के लिए आगे आए थे। इस साल रिलीज हुई फिल्म जौली एलएलबी टू में किसान सीताराम की भूमिका में भले कोर्ट में अपने आप को जिंदा दिखाने के लिए नजर आए थे, लेकिन लंबी बीमारी से लड़ते हुए वे अपने चाहने वालों को अलविदा कह गये।
इन फिल्मों में अभिनय कर छाया था केयू का छोरा
1989 में छन्नो, इन विच एनी गीव्स इट दोज वंस, 1994 में शेखर कपूर की बैंडिट क्वीन,2001 में अजय देवगण के साथ फिल्म लज्जा,2001 में राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाली पहली हरियाणवी फिल्म लाडो, द वारियर,2002 में नाना पाटेकर के साथ शक्ति द पावर में मंत्री के रोल में नजर आए। इसके अलावा 2002 में ही लीजेंड आफ भगत सिंह, 2003 में खुशी, 2004 में सौ झूठ एक सच, 2005 में बिहाइंड द मिरर, 2008 में हल्ला बोल और स्लमडाग मिलेनियर, 2010 में पीपली लाइव, 2010 में स्ट्रीकर, 2011 में साहिब बीबी और गैंगस्टर, 2012 में अर्जुन द बारियर, 2012 में पान सिंह तोमर और पाकाऊ, 2013सारे जहां से महंगा और अम्मा की बोली, 2015 में बंपर ड्रा, 2016 में रेबेलियस फ्लावर, 2016 में भौरी और इसी साल रिलीज हुई अक्षय कुमार के साथ जौली एलएलबी टू जैसी चुनिंदा फिल्मों में सीताराम पांचाल ने अपने अभिनय किया।
कुरुक्षेत्र मैक में मदद के प्रयास के दौरान निधन
हरियाणा कला परिषद और मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर कुरुक्षेत्र भी सीताराम पांचाल के मदद से लिए आगे आया था। दुर्भाग्यवश उनका निधन तब हुआ जब कुरुक्षेत्र के मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर में सीताराम पांचाल को आर्थिक मदद देने के लिए तीन दिवसीय नाट्य उत्सव जारी था। मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर के मुख्य सलाहकार महेश जोशी, रंगकर्मी एवं केयू शिक्षक डा.मधुदीप सिंह ने कहा कि सीताराम पांचाल का निधन रंगमंच को एक बड़ा झटका है। गौरतलब है कि पिछले दिनों कुरुक्षेत्र में हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान विशेष पुरस्कार से नवाजा गया था।
हरियाणवी कलाकारों का हौसला थे पांचाल
केयू के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के पूर्व निदेशक अनूप लाठर और पूर्व निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने सीताराम पांचाल के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि वे हरियाणवी कलाकारों के लिए हौसला थे। उन्होंने अपने छात्र जीवन में केयू और एनएसडी से बॉलीवुड एवं छोटे पर्दे पर अपने दमदार अभिनय क्षमता से एक अलग मुकाम हासिल किया था। केयू से उन्हें काफी लगाव था। पांचाल ने अपने व्यस्त समय में से केयू आकर समय समय पर युवा कलाकारों को प्रेरित किया।