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नारी के संघर्ष को दिखा गया नाटक अमानत एक शहीद की

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‘अमानत एक शहीद की’ में दिखा नारी का संघर्ष
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-पति व बेटे को खोने के बाद भी माल्ती बनी समाज का सहारा
-उत्सव के दूसरे दिन कलाकारों के दमदार अभिनय ने भिगोई दर्शकों की आंखें
-कलाकारों के अभिनय को मिली सराहना, सभागार में गूंजी तालियां
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
‘अमानत एक शहीद की’ नाटक के जरिये कलाकारों ने शानदार अभिनय के जरिये 1984 के दंगों के बाद की कहानी प्रदर्शित किया। हरियाणा स्वर्ण जयंती के अवसर पर हरियाणा कला परिषद मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर की ओर से यह नाटक उत्सव स्व. रंगकर्मी सीताराम पांचाल के परिवार को आर्थिक सहयोग के लिए आयोजित किया जा रहा है। तीन दिवसीय नाट्य उत्सव के दूसरे दिन न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने विकास शर्मा का लिखा और उन्हीं के और मनीष डोगरा के निर्देशन में उक्त नाटक मंचन किया। नाटक अमानत एक शहीद की में 1984 में हुए दंगों के बाद की कहानी को दिखाया गया।
नाटक में दंगों में शहीद हुए सैनिक के परिवार पर आ रही कठिनाइयों को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक कहानी मुख्य पात्र माल्ती के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। माल्ती एक ऐसी महिला है जो अपने पति की मौत के बाद अपने मंदबुद्धि बच्चे के साथ दर-दर भटकती रहती है। लोग उसकी आबरु के साथ खेलने का प्रयास करते हैं, लेकिन वह सबसे बचकर एक बूढ़े सरदार के घर पनाह लेती है। बूढ़ा सरदार व उसकी पत्नी हरनाम कौर माल्ती और उसके बच्चे को बहुत प्यार से रखते हैं, लेकिन उनके बेटे-बहू को ये सब ठीक नहीं लगता। इस कारण दोनों हर दिन माल्ती से लड़ते रहते हैं। सरदार की बहू को कोई औलाद न होने के कारण एक ढोंगी बाबा उसे मां बनने के सुख के लालच में एक बच्चे की बलि देने को कहता है, जिसके बाद सरदार की बहू माल्ती के बेटे को जहर खिला देती है।
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माल्ती का सब-कुछ खत्म हो जाता है। पति और बेटे के न रहने के कारण माल्ती भी खुद को मारने की कोशिश करती है, लेकिन वह खुद को खत्म न करके अपने जैसी बेसहारा और असहाय महिलाओं के हित में काम करने का बीड़ा उठा लेती है। इस प्रकार महिलाओं के दर्द को बयान कर गया नाटक अमानत एक शहीद की।
नाटक में माल्ती की भूमिका में पारुल कौशिक, सरदार की भूमिका में विकास शर्मा, सरदारनी की भूमिका दीपक जांगड़ा, सुक्खा सिंह साजन कालड़ा, रानी महक माल्यान, राजू साहिल मैहला, मुनिम की भूमिका में शिव कुमार किरमिच, ढोंगी बाबा नरेश सागवाल तथा अन्य भूमिकाओं में अनु रानी, अमन सैनी, जोगी राम, सोनिया चैहान, शाईना जग्गा, आश्रय शर्मा, नीरज, अंकित चैहान, गुरदीप सिंह, काकुल व अमरदीप ने अपनी प्रतिभा को दिखाया। ध्वनि व्यवस्था रोहित ने सम्भाली तथा प्रकाश व्यवस्था पर मनीष डोगरा ने साथ दिया। रुपसज्जा काका सिंह ने की।
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नाटक के अंत में मैक के मुख्य सलाहकार महेश जोशी व अतिरिक्त मुख्य सलाहकार संजय भसीन ने सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंटकर हौसलाअफजाई की। कार्यक्रम के दौरान मुख्य सलाहकार महेश जोशी ने नाटक की सराहना की। इस मौके पर मैक समन्वय मदन डागर, ललित कला समन्वयक सीमा काम्बोज, लेखा परीक्षक अजमेर सिंह, प्रो. मधूदीप सिंह, सतीश कालड़ा, मीनू शर्मा, गुलशन सैनी, सुग्रीव, माईक्रोसागर, आरती, साहिल आदि उपस्थित रहे।
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