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खेमका विवाद : कैग ने शुरू नहीं की जांच

Sun, 19 Jan 2014 12:14 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीनियर आईएएस अशोक खेमका के खिलाफ जिस गैलवैल्यूम शीट का टेंडर देने के मामले में गड़बड़ी की आशंका के चलते सीबीआई जांच कराने का फैसला किया है, उसी मामले में विशेष ऑडिट कराने का भी फैसला किया था, मगर कैग ने अब तक विशेष ऑडिट शुरू नहीं किया है।
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हरियाणा सरकार ने 27 नवंबर, 2013 को हरियाणा के प्रधान महालेखाकर को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के एमडी पद पर रहते हुए अशोक खेमका ने गोदामों की गैलवैल्यूम शीट बदलने का ठेका दिया था, जिसमें आर्थिक गड़बड़ी सामने आई है।

इसलिए खेमका के कार्यकाल (11 जुलाई, 2008 से 23 अप्रैल, 2010 तक) में जितनी भी गड़बड़ी हुई हैं, उसका विशेष ऑडिट किया जाए। यह फैसला राज्य सरकार ने किया है।
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उधर, प्रधान महालेखाकर ओंकार नाथ से शनिवार को अमर उजाला ने हरियाणा सरकार के आग्रह पत्र पर की गई कार्रवाई के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का आग्रह पत्र कैग के पास भेज रखा है।

चूंकि यह विशेष ऑडिट है और सीनियर आईएएस अशोक खेमका से मामला जुड़ा है, इसलिए विशेष ऑडिट के लिए कैग से मंजूरी मांगी है। सामान्य स्थिति में वे (प्रधान महालेखाकार) स्वयं ही विशेष ऑडिट कराने के लिए सक्षम हैं।

प्रधान महालेखाकार को भेजे पत्र में यह लगा रखा है आरोप
मूल वर्क आर्डर 18 फरवरी, 2009 को 7.93 करोड़ रुपये दिया गया था। गुजरात की इसी कंपनी को 26 मार्च, 2009 को 1.01 करोड़, 5 फरवरी, 2010 को 3.18 करोड़ और 23 अप्रैल, 2010 को 5.90 करोड़ रुपये का ठेका बढ़ा दिया।

यह 127 फीसदी है। इस तरह इस कंपनी को कुल 18.04 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया। बिना बाजार भाव जाने और ताजा टेंडर लिए बगैर एक ही कंपनी को ठेका बढ़ाने का आदेश जारी करना टेंडर प्रक्रिया के नियमों के खिलाफ है।

हैफेड ने इससे ज्यादा रेट पर टेंडर दिया था
हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन की तरफ से कृषि विभाग के प्रधान सचिव को शिकायत में लिखे आरोपों का जवाब भेज रखा है।

कारपोरेशन ने जवाब में लिख रखा है कि उन्होंने तो 1127 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से ठेका दिया था, जबकि हैफेड ने न तो 1152 रुपये प्रति वर्गमीटर ठेका दिया था।
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ठेका देने में कोई अनियमितता नहीं बरती गई। यह जरूर है कि गैलवैल्यूम शीट लगाने से पहले कोई स्टडी नहीं करवाई गई।
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