करनाल। पशुपालन में उत्पादकता बढ़ाने, पशुओं को बीमारियों से बचाने और आय में सुधार के लिए महिला किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए। इसके लिए सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाना भी जरूरी है। राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) में आयोजित महिला किसान दिवस पर विशेषज्ञों ने 22 गांवों से पहुंचीं 100 से अधिक महिला किसानों को पशु स्वास्थ्य, स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, वित्तीय सेवाओं और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान महिला किसानों को दुग्ध संग्रहण और स्वच्छ पशुपालन में सहायक सामग्री भी वितरित की गई।
कार्यक्रम में ब्यूरो के निदेशक डॉ. एनएच मोहन मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कृषि, पशुधन प्रबंधन और मूल्यवान पशु आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने महिला किसानों से वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियां अपनाने और उत्पादकता व आजीविका में सुधार के लिए संस्थागत सहायता का लाभ उठाने का आह्वान किया।
पशु आनुवंशिकी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसपी दीक्षित ने स्वदेशी पशुधन नस्लों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उन्नत और वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ स्वदेशी नस्लों का संरक्षण पशुपालन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी है। कार्यक्रम में महिला किसानों ने विशेषज्ञों के सामने खेत और पशुपालन से जुड़ी समस्याएं रखीं। उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। महिला किसानों को दूध के कैन, पशु मैट, टॉर्च, गमबूट सहित अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई, ताकि पशुपालन कार्यों को अधिक सुविधाजनक और स्वच्छ बनाया जा सके।
बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक तरसेम चंद और कृषि प्रकोष्ठ के मोहित दलाल ने महिलाओं के लिए उपलब्ध बैंकिंग योजनाओं और वित्तीय सेवाओं की जानकारी दी। खंड कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार ने कृषि योजनाओं, सब्सिडी और सहायता सेवाओं के बारे में बताया। उन्होंने महिलाओं को इनका लाभ लेकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), उचानी के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुजय खन्ना ने पशुओं में होने वाले सामान्य रोगों, उनके लक्षण, रोकथाम और उपचार की जानकारी दी। उन्होंने समय पर पशु चिकित्सा सहायता और उचित देखभाल को दुग्ध उत्पादन में सुधार के लिए जरूरी बताया।