इलाज कराने की जगह स्टाम्प पर साइन मांगने लगे
आर्यन ने बताया कि जब घर वाले मोनिका के ससुराल पहुंचे तो वह बीमार थी। इलाज कराने के बजाय ससुराल पक्ष ने मायके वालों से स्टाम्प पेपर पर साइन करवाने की बात कही और कहा कि तभी मोनिका को उनके साथ भेजा जाएगा। यह सुनकर परिवार हैरान रह गया। आखिर कौन पिता अपनी ही बेटी को ले जाने के लिए कानूनी सहमति देगा? कुछ देर बात करके मायका पक्ष वहां से लौट आया और मोनिका ने भी उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज दिया।
"पापा के सामने नहीं बोल पाई, मुझे डराया गया"
आर्यन ने बताया कि रविवार को फिर मोनिका का फोन आया। वह बहुत डरी हुई आवाज में बोल रही थी। उसने कहा कि मुझे जहर दे दिया गया है मैं अब नहीं बचूंगी। पापा के सामने कुछ नहीं बोल पाई, क्योंकि मुझे धमकाया गया था। मेरे पति, सास, ससुर, देवर, देवरानी और ताऊ के बेटे ने मिलकर मुझे प्रताड़ित किया है। यह सुनकर आर्यन घबरा गया और फिर से अपने घरवालों को डाबर भेजा और खुद भी तत्काल टिकट करवाकर गोवा से करनाल आया।
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