संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक श्री प्रज्ञांश सागर महाराज के सानिध्य में विराग सागर महाराज के देवलोक गमन पर जैन समाज ने विनयांजलि समर्पित की। प्रज्ञांश सागर महाराज ने बताया कि समाधिस्थ आचार्य श्री ने मात्र 17 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर राग से वैराग्य का मार्ग चुन लिया था। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने आचार्य पद सुशोभित किया।
विराग सागर महाराज ने छह साहित्यों पर शोध किया। बच्चों के लिए 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने 350 शिष्यों को दीक्षा प्रदान की व 150 से अधिक बुजुर्गों को दीक्षा देकर संलेखना पूर्वक समाधि कराई। लाखों किलोमीटर की पद यात्रा करते हुए औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में चातुर्मास के लिए ससंघ विहार चल रहे थे कि उनका अचानक स्वास्थ्य बिगड़ा व समाधि का पूर्वाभास होने पर पूर्ण सजगता से अपने आचार्य पद का त्याग कर श्रमणाचार्य विशुद्ध सागर को सौंप दिया। इस अवसर पर विपिन जैन, सीए जोशिल जैन और संदीप जैन श्री शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया। जिसमें श्री दिगंबर जैन सोसायटी के अध्यक्ष विरेश के नेतृत्व में समाज के लगभग 50 भक्तों ने भाग लिया।