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आतंकियों के निशाने पर देश के युवा, नशे से कर रहे खोखला

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देव शर्मा
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करनाल। सरहद पार से आतंकी देश पर डबल अटैक करने की तैयारी में हैं। पहला विस्फोटक सामग्री और हथियार भेजकर देश को दहलाने की साजिश कर रहे हैं, वहीं, इसके बदले अपने ही गुर्गों को हेरोइन आदि नशीले पदार्थ दे रहे, जिसके सहारे वे युवाओं को नशे का आदी बनाना चाहते हैं।
यह पहला मौका नहीं है, जब पंजाब के सहारे देश के अन्य हिस्सों में नशे की खेप पहुंचाने की साजिश का खुलासा हुआ है। करनाल पुलिस द्वारा पकड़े गए चारों आतंकियों से अब तक हुई पूछताछ के बाद स्पष्ट हो गया है कि बब्बर खालसा का आतंकी हरविंद्र सिंह रिंदा ड्रोन के जरिए पंजाब के फिरोजपुर जिले में जो विस्फोटक सामग्री व हथियार भेजता था, उसे उसकी बताई गई लोकेशन पर पहुंचाने वालों को जो पारिश्रमिक मिलता था, वह नगदी नहीं बल्कि हेरोइन देता था। जिसे और महंगा बेचकर उसके गुर्गे कई गुना अधिक धन कमाते थे।
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यह रिंदा की साजिश थी। भले ही विस्फोटक सामग्री व हथियार पकड़े जाएं, लेकिन जो हेरोइन देश के विभिन्न शहरों में पहुंचाई गई है, वह युवाओं को नशे का आदी बनाकर उन्हें खोखला करने का कार्य जरूर करेगी। पंजाब से जम्मू कश्मीर तक पाकिस्तान की सरहद से सटे भारतीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में पिछले वर्षों में हेरोइन आदि ड्रग्स बरामद भी की गई है। अब तो ये नशा युवाओं के साथ-साथ किशोरों व बच्चों में भी पकड़ तेजी के साथ बना रहा है। जो कार्य विस्फोटक नहीं कर पाते, वो कार्य नशा कर रहा है।
लोकसभा में उठा था मुद्दा
अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड (INCB) ने अपनी 2018 की रिपोर्ट में भारत को ड्रग्स के अवैध कारोबार का प्रमुख केंद्र बताया था। वहीं 25 जून 2019 को लोकसभा में भी नशे का मामला उठा था, जिसमें वर्ष 2017 में देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के 47,344 मामले सामने आने की बात कही गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक 12,439 मामले पंजाब में ही बताए गए थे। केरल 8440 मामलों के साथ दूसरे तो उत्तर प्रदेश 6693 मामले के साथ तीसरे नंबर पर बताया गया था।
ड्रोन से भेजने का हुआ खुलासा
देश में विस्फोटक व हथियार ड्रोन के माध्यम से पाकिस्तान से भारत भेजे जाने का खुलासा तो करनाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आतंकियों से हो ही चुका है। हालांकि इससे पहले भी पंजाब, जम्मू कश्मीर जैसे सीमांत राज्यों में नशे की खेप भेजने के लिए सीमांत गांवों को माध्यम बनाया जाता था। इसके लिए एक-दूसरे देश से गुजरने वाले नदी-नालों का सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है।
74 प्रतिशत आत्महत्या के मामले पंजाब से
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2007 से 2017 तक 10 वषों में ड्रग्स से संबंधित 25,000 से ज्यादा आत्महत्याएं हुई थीं। इसमें 74 प्रतिशत मामले सिर्फ पंजाब से हैं। ये स्थिति तब है, जब खुदकुशी के कुल मामलों में से 70 प्रतिशत मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते हैं।
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साढ़े दस महीनों में 151 मामले हुए थे दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एक जनवरी से 19 नवंबर 2021 तक करनाल जिले में नशीले मादक पदार्थों के कारोबार में संलिप्त 192 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 151 मुकदमे दर्ज किए गए। इसमें 675.658 किलोग्राम चूरा पोस्त, 105.440 किलोग्राम गांजा पत्ती, 73.181 किलोग्राम अफीम, 2.954 किलोग्राम चरस, 7.575 किलोग्राम वजनी अफीम के पौधे, 0.687 किलो ग्राम स्मैक, 51.247 किलोग्राम अवैध नशीली गोलियां व कैप्सूल व व 67 बोतल विभिन्न मादक पदार्थों का मिश्रण (गट्टू) बरामद किया गया। अवैध नशीली गोलियां व कैप्सूल की संख्या हजारों में थी।
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