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Karnal News: खौफनाक था वह मंजर, घंटों तक जान बचाने की रही जद्दोजहद

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खौफनाक था वह मंजर, घंटों तक जान बचाने की रही जद्दोजहद
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खौफनाक था वह मंजर, घंटों तक जान बचाने की रही जद्दोजहद
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ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों संग बरस रहे थे पेट्रोल बम, हो रही थी फायरिंग
नूंह में हुए दंगे से सुरक्षित लौटकर आए करनाल के लोगों ने बताई आपबीती
बोले, शिव मंदिर में शरण लेकर भगवान से कर रहे थे बचाने की प्रार्थना
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नूंह में हुए दंगे का वह भयानक मंजर याद कर रूह कांप जाती है। ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा था। सोमवार को दोपहर करीब एक बजे ब्रजमंडल शोभायात्रा के दौरान अचानक पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते पेट्रोल बम गिरने लगे। अचानक सड़कों पर उतरे उपद्रवी लोगों पर लाठी-डंडे बरसाने लगे। रह-रहकर फायरिंग की आवाज से हर तरफ दहशत फैल गई। यात्रा में शामिल लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। करीब छह घंटे तक सभी जान बचाने की जद्दोजहद करते रहे। यह कहना है प्रत्यक्षदर्शियों का, जो करनाल से यात्रा में शामिल होने के लिए नूंह पहुंचे थे।
करनाल के जिला गो रक्षक दल के प्रधान संदीप राणा ने बताया कि नूंह के शिव मंदिर में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। सभी लोग बारी-बारी से मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे थे। इसके बाद मंदिर परिसर से शोभायात्रा निकली। वे मंदिर से अपनी-अपनी गाड़ियों व बसों में कुछ दूरी पर आगे निकले थे कि सामने से अचानक समुदाय विशेष के सैकड़ों युवा सड़क पर आ गए और शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पेट्रोल बम, ईंट-पत्थर, लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस दौरान करनाल जिले से ही विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष सतीश गुप्ता अपनी गाड़ी में आगे चल रहे थे।
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सबसे पहले उपद्रवियों ने उनकी गाड़ी पर पेट्रोल बम फेंका, जिसके बाद वे तुरंत अपनी गाड़ी से बाहर निकल आए। उनकी आंखों के सामने ही गाड़ी में उपद्रवियों ने आग लगा दी। इसके बाद यात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं में अफरातफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोगों ने वापस शिवमंदिर परिसर में पहुंचकर शरण ली और भगवान से घंटों तक प्रार्थना करते रहे। इस दौरान चारों ओर से शिव मंदिर परिसर में समुदाय विशेष के लोग पेट्रोल बम फेंक रहे थे और फायरिंग कर रहे थे। सड़कों पर धू-धूकर वाहन जल रहे थे। उन्होंने फोन कर पुलिस को हमले की जानकारी दी, लेकिन करीब छह घंटे के बाद पुलिस व जिला प्रशासन के लोग वहां पहुंचे और उन्हें सुरक्षित निकाला। इस छह घंटे के बीच उन्होंने स्वयं ही अपनी और बहन-बेटियों की रक्षा की।
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