करनाल। श्रीगंगानगर से बठिंडा जा रही इंटरसिटी ट्रेन में बुधवार को लगी आग की घटना के बाद भी स्थानीय रेल प्रशासन नहीं जागा है। ए ग्रेड रेलवे स्टेशन होने के बावजूद यहां आग से निपटने के लिए न तो पुख्ता इंतजाम हैं और न ही कोई आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद है।
रेलवे स्टेशन परिसर में आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह नदारद हैं। आग बुझाने के नाम पर कुछ पुरानी बाल्टियां जरूर रखी गई हैं, लेकिन उनकी हालत खुद हादसे को न्योता दे रही है। प्लेटफार्म नंबर एक पर रखी बाल्टियों में जमी बालू और भरे पानी में काई जमी है, जो यह दर्शाती है कि वर्षों से उनकी न सफाई हुई और न ही किसी ने उनकी सुध ली।
इतना ही नहीं, स्टेशन के किसी भी प्लेटफार्म पर अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं। यदि कभी ट्रेन में या स्टेशन परिसर में आग लग जाती है तो यात्रियों को खुद ही अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। प्लेटफार्म नंबर एक और दो पर मुख्य लाइन में पानी की व्यवस्था भी नहीं है। ट्रेनों में जब पानी खत्म हो जाता है तो उन्हें यार्ड लाइन में ले जाकर भरा जाता है। ऐसे में यदि प्लेटफार्म पर कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो पानी की तत्काल व्यवस्था करना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
फायर अलार्म सिस्टम नहीं
रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्रियों का आवागमन होता है। इसके बावजूद सुरक्षा और आपात प्रबंधन को लेकर लापरवाही चिंताजनक है। ए ग्रेड स्टेशन होने के बावजूद न तो आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम है और न ही नियमित रूप से सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाती है।
वर्जन—
- हमारे पास आग बुझाने के लिए 6 बाल्टियां हैं और चार अग्निशामक यंत्र मौजूद हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए बाल्टियों में बालू और पानी भरा है।
- संजय सक्सेना, स्टेशन अधीक्षक, करनाल
रेलवे स्टेशन पर लगा अग्नि शामन यंत्र। संवाद