माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर की हवा की सेहत नहीं सुधरी है। बुधवार को भी शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 225 दर्ज किया गया। मुख्य वजह हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 के कणों की संख्या ज्यादा होना माना जा रहा है। एक ओर शहर की सड़कों से उड़ती धूल शहरवासियों के गले की फांस बन रही तो दूसरी ओर सेक्टर-4 में रेत के ढेरों से धूल के गुबार उठ रहे हैं।
प्रशासन ग्रेप-3 के नियमों का पालन कराने का दावा कर रहा है लेकिन धरातल पर तस्वीर विपरीत ही है। कूड़े के जलाने पर रोक नहीं लगने के साथ निर्माण सामग्री को ढकने के आदेश भी हवा में उड़ाए जा रहे हैं। सेक्टर-4 में लगे रेत के ढेर प्रशासन के दावे की पोल खोल रहे हैं।
इस माह में 26 में से 20 दिन शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रही। एक्यूआई 200 से ऊपर दर्ज किया गया। प्रदूषण के मामले में करनाल अब अपने पड़ोसी शहरों से आगे निकल चुका है। बुधवार को अंबाला का एक्यूआई 198, चंडीगढ़ का 156, कुरुक्षेत्र का 205 दर्ज किया गया। यमुनानगर का 242 और सोनीपत का एक्यूआई 291 रहा।
बुधवार को शहर की हवा में पीएम 2.5 की मात्रा औसतन 225 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई। साफ हवा में इनकी मात्रा 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए। पीएम 10 के कणों की मात्रा 133 दर्ज की गई। जो 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए।
गले और छाती की बीमारियां बढ़ रहीं
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिभव डागर ने बताया कि शहर का बढ़ते प्रदूषण स्तर का असर बच्चो, बुजुर्गों पर अधिक पड़ता है। प्रदूषण का ये स्तर विशेष तौर पर सांस के मरीजों के लिए हानिकारक है। इससे गले और छाती में कई प्रकार की बीमारियां पनप सकती हैं। लगातार खराब हो रही हवा के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी, आंखों में जलन, दमा और एलर्जी के मामलों में वृद्धि हो रही है। विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों में फेंफड़ों से संबंधित समस्याएं आने लगी हैं। शहर में निकलने से पहले लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।