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फीस वृद्धि की का मामला पहुंचा लघु सचिवालय, आयुक्त ने आश्वासन देकर लौटाया

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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। कोरोना संक्रमण के दौरान अभिभावकों और निजी स्कूल प्रबंधकों के बीच उठा घमासान थमने का नाम नहीं रहा है। निजी स्कूलों ने एक बार फिर फीस और वार्षिक शुल्क बढ़ा दिए हैं। अभिभावक इसका काफी समय से विरोध कर रहे हैं। अभिभावकों और निजी स्कूल प्रबंधकों का बढ़ता विवाद देख अब उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया है। उच्च न्यायालय ने प्रशासन को इस मामले का समाधान करवाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में आयुक्त रेनू फुलिया लघु सचिवालय पहुंची थीं। जबकि अभिभावक पेरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले आयुक्त से मिलने आए थे। आयुक्त ने उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया। यहां अभिभावकों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेेबाजी की। यहां अभिभावकों ने आयुक्त के सामने अपनी समस्याएं रखी।
एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता साहिब गुर्जर ने कहा कि निजी स्कूल अपनी मर्जी से फीस व शुल्क बढ़ा रहे हैं। स्कूल की मनमानी के कारण अभिभावक बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ हैं। स्कूलों ने 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। अभिभावकों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।अभिभावकों की फीस वृद्धि की शिकायत पर आयुक्त ने कहा कि इसे देखते हैं और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान यहां पहुंचे आकाश, मोहिनी, राधिका, धमेंद्र, रमेश, नेहा, साहिब सिंह ने बताया कि निजी स्कूल हर साल वार्षिक शुल्क ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें हर साल वृद्धि भी की जा रही है। जो बच्चा नर्सरी से एक ही स्कूल में पढ़ रहा है उससे हर साल दाखिला नहीं लिया जाना चाहिए। अधिवक्ता साहिब सिंह ने बताया कि सर्वोच्च व उच्च न्यायालय ने भी स्कूलों को ट्यूशन फीस के अतिरिक्त शुल्क न लेने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन नहीं मान रहे हैं। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से भी दाखिला फीस ली जा रही है।
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आयुक्त ने अभिभावकों के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था। जिस पर कुछ अभिभावक प्रतिनिधिमंडल के रूप में आयुक्त से मिले। इस दौरान बाहर खड़े अभिभावकों ने उन पर मनमानी का आरोप लगाया। बाहर आने पर अभिभावकों में बहस हो गई। कुछ ने आरोप लगाया कि वे पक्षपात कर रहे हैं, वे केवल अपनी समस्या का समाधान करवाने चाहते हैं, जबकि यह सामूहिक व सामाजिक मुद्दा है।
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फार्म छह की करवाई जाए जांच
अभिभावकों ने जब फीस बढ़ोतरी का मुद्दा रखा तो आयुक्त ने कहा कि उन्हें फीस देनी होगी। स्कूलों ने इसके लिए सरकार को फार्म छह दिया है। जिसके तहत उन्हें फीस बढ़ोतरी का अधिकार है। इस पर अभिभावकों ने कहा कि इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो स्कूलों के जमा किए फार्म छह की जांच करें। ताकि पता चले कि उनके द्वारा की गई वृद्धि सही है। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल दस प्रतिशत वृद्धि कर सकते हैं, जबकि वे 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ा रहे हैं, जो कि सही नहीं है। जिस पर आयुक्त ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी समस्याओं का समाधान करवाया जाएगा।
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