करनाल। गणेशोत्सव की आहट के साथ शहर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयरी तेज हो गई हैं। इस बार जिले में गणेश प्रतिमाओं के बाजार में मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा और पुणे के दगडूशेठ गणपति के स्वरूपों की लोकप्रियता सबसे अधिक दिखाई दे रही है।
घर में स्थापना करनी हो या बड़े पंडाल को सजाना हो, श्रद्धालुओं की पहली पसंद इन्हीं दोनों स्वरूपों की प्रतिमाएं बन रही हैं। प्रतिमा विक्रेता श्रवण ने बताया कि अलग-अलग आकार की प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। हर आकार में लालबाग के राजा और दगडूशेठ स्वरूप की मांग ज्यादा है। घरों में गणपति की स्थापना कर विसर्जन करने वाले श्रद्धालु 10 इंच से ढाई फीट तक की प्रतिमाएं पसंद कर रहे हैं।
सार्वजनिक गणेशोत्सव और बड़े पंडालों के लिए करीब 10 फीट ऊंची प्रतिमाओं की मांग अधिक है। छोटी प्रतिमा की कीमत करीब 100 रुपये से शुरू होती है। बड़ी प्रतिमाओं की कीमत करीब 15 हजार रुपये तक है। प्रतिमा का आकार बढ़ने के साथ उसे तैयार करने में लगने वाला समय और मेहनत भी बढ़ जाती है।
राजस्थान से आकर प्रतिमाएं तैयार करने में जुटा परिवार
श्रवण का परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है। श्रवण के अनुसार गणेशोत्सव कुछ दिनों का कारोबार है। इसकी तैयारी कई महीने पहले शुरू करनी पड़ती है। उनके परिवार ने अप्रैल से ही गजानन की प्रतिमाएं तैयार करना शुरू कर दिया था। गणेशोत्सव नजदीक आने के साथ बिक्री ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। पूरा परिवार करनाल में रहकर प्रतिमा निर्माण के काम से जुड़ा है। परिवार कई वर्षों से इस कार्य में लगा है।
14 सितंबर से शुरू होगा गणेशोत्सव
गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ होगी। इसी दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। पंडित मांगे राम शर्मा और पंडित हरिराम शास्त्री ने बताया कि गणेश चतुर्थी की तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे से 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। सामान्य तौर पर गणेशोत्सव 10 दिन तक चलता है। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ इसका समापन होगा। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार गणेश प्रतिमा का विसर्जन डेढ़ दिन, तीन, पांच या सात दिन में भी कर सकते हैं।
नमस्ते चौक पर सड़क किनारे रखते गणपति जी। संवाद
नमस्ते चौक पर सड़क किनारे रखते गणपति जी। संवाद