संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी पाते हुए एक डेयरी किसान के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता किसान लखविंद्र को भैंस की मौत का 80 हजार रुपये दावा और मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा अदा करे। इस प्रकार कंपनी अब किसान को एक लाख 11 हजार रुपये का मुआवजा देगी।
निसिंग निवासी लखविंदर सिंह ने अपनी दो भैंसों का बीमा 7 अक्तूबर, 2022 को 2,427 रुपये में करवाया था। बीमा होने के कुछ समय बाद 26 अक्तूबर, 2022 को उनकी एक भैंस बीमार हो गई और इलाज के दौरान 28 अक्तूबर, 2022 को वह मर गई। उन्होंने पशु अस्पताल निसिंग में भैंस के शव का पोस्टमार्टम करवाया। इसके बाद भैंस के कान पर लगा हुआ टैग, बीमा कंपनी के एजेंट को जमा करवा दिया। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि भैंस की बीमारी और मौत पॉलिसी शुरू होने के 21 दिनों के भीतर हुई है, जो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा कवर में नहीं आता। कंपनी का दावा था कि भैंस 26 अक्तूबर यानी 19वें दिन ही बीमार पड़ गई थी।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कंपनी के दावों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि भैंस की मौत 28 अक्तूबर को हुई, जो पॉलिसी शुरू होने (7 अक्तूबर) के 21 दिन बाद का समय है। कंपनी की ओर से बीमारी के दिन से गणना करना कानूनन सही नहीं है। इसके अलावा आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने जिस सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर क्लेम रद्द किया था, उस पर न तो हस्ताक्षर थे और न ही कोई मुहर, जिस कारण अदालत ने उसे सबूत मानने से इनकार कर दिया।
बीमा राशि नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने बीमा कंपनी को बीमा राशि के रूप में 80 हजार रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए। इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमा खर्च के तौर पर 11 हजार रुपये की राशि देने के आदेश जारी किए। अदालत ने इस आदेश को 45 दिनों के भीतर लागू करने का समय दिया है। सरकारी पशु चिकित्सक के खिलाफ कोई दोष सिद्ध न होने पर उनके विरुद्ध मामला खारिज कर दिया गया।