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12 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित, 10 दिन बाद परीक्षा अब तक नहीं मिला दाखिला

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गगन तलवार
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करनाल। सत्र 2021-22 में स्कूलों की वार्षिक परीक्षा होने में महज 10 दिन शेष हैं लेकिन अभी भी प्रदेश में 12005 विद्यार्थी नियम 134ए के तहत दाखिले से वंचित हैं। ऐसे में इन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई है, क्योंकि वे पहले जिस स्कूल में पढ़ रहे थे वहां से नियम 134ए में चयन होने के बाद एसएलसी कटवा ली है। लेकिन आवंटित हुए स्कूल प्रबंधन ने उन्हें कोर्ट केस का हवाला देकर दाखिला नहीं दिया है।
करीब तीन माह से चल रही प्रक्रिया में दाखिला देने के मामले में प्रदेश में सिरसा नंबर एक पर है। फरीदाबाद में सबसे कम महज 19.4 प्रतिशत दाखिले हुए।
यमुनानगर दाखिले देने में 9वें और और करनाल 10वें पायदान पर है। सभी 22 जिलों में 45288 विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट हुए थे। इनमें से दोनों चरणों में कुल 21577 यानी 47.7 प्रतिशत विद्यार्थियों का दाखिला हुआ। जबकि 11706 यानी 25.9 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन को स्कूलों ने खामी बताते हुए निरस्त कर दिया और शेष विद्यार्थी दाखिले से वंचित हैं। वहीं स्कूलों में 15 मार्च से परीक्षाएं भी शुरू होने जा रही हैं।
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अभिभावक बोले, सरकार चुप रही और स्कूलों ने किया गुमराह
अभिभावक सतीश, गुलशन, लक्ष्य और ममता का कहना है कि स्कूल आवंटन के बाद उन्होंने अपने बच्चों का एसएलसी पुराने स्कूल से कटवा दिया था। नए स्कूल में जब गए तो वे कई तरह के दस्तावेज मांगने लगे। जब दस्तावेज पूरे कर दिए तो कोर्ट केस का हवाला देते हुए स्कूलों ने दाखिला देने से मना कर दिया। अब तीन माह से बच्चे घर पर हैं। पुराने स्कूल भी दाखिला नहीं दे रहे हैं। हम कहां जाएं, अधिकारी भी नहीं सुनते। स्कूलों ने हमें गुमराह किया है।
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इस जिले की यह है स्थिति
रैंक जिला विद्यार्थी दाखिला हुआ प्रतिशत
01 सिरसा 1419 917 64.7
02 कुरुक्षेत्र 2478 1571 63.4
08 कैथल 2603 1400 53.8
09 यमुनानगर 2187 1147 52.5
10 करनाल 3070 1588 51.8
11 पानीपत 2403 1240 51.7
13 रोहतक 1913 813 42.5
14 सोनीपत 2815 1172 41.7
16 गुरुग्राम 1586 597 37.7
18 अंबाला 2182 742 34.1
(सिरसा में 35.3 प्रतिशत विद्यार्थियों के दाखिले हुए निरस्त)
दाखिला प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। कई विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह गए हैं। कई स्कूलों ने कोर्ट केस का हवाला देकर दाखिला नहीं दिया। विभाग के निर्देशों का इंतजार है। फिलहाल जो विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह गए हैं, उन्हें पुराने स्कूलों से ही परीक्षा देनी पड़ेगी।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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