पंजाब के बादल परिवार पर एकाधिकार और सदस्यों के अधिकारों का हनन करने सहित अन्य आरोपों लगाते हुए शिरोमणि अकाली दल (बादल) को हरियाणा के रहने वाले सदस्यों ने अलविदा कह दिया है। साथ ही हरियाणा के लिए अलग से नए दल शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट का गठन किया।
सोमवार को पार्टी में हरियाणा से जुड़े राष्ट्रीय कार्यकारिणी, प्रदेश पदाधिकारी और जिला अध्यक्षों समेत अन्य सदस्यों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दिया। यही नहीं उन्होंने इसके साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सदस्यता को भी छोड़ा है। डेरा कार सेवा में सम्मेलन करते हुए पदाधिकारियों ने इसका एलान किया है।
सम्मेलन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य व शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपप्रधान भूपिंदर सिंह असंध, सिरसा से एसजीपीसी सदस्य गुरमीत सिंह तिलोकेवाला, पार्टी महिला विंग की हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष व कुरुक्षेत्र से एसजीपीसी के पूर्व सदस्य बीबी रविंदर कौर, पार्टी के राष्ट्रीय वरिष्ठ उप प्रधान व अंबाला से एसजीपीसी के पूर्व सदस्य सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़ और हरियाणा प्रवक्ता कवलजीत सिंह अजराना विशेष रूप से पहुंचे।
सम्मेलन में उनके अलावा प्रदेश के 10 जिलों से अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, हल्का प्रधानों और शहरी प्रधानों ने शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट की सदस्यता ग्रहण की। साथ ही चुनाव तक नए दल के संचालन के लिए पांच सदस्य कमेटी का भी गठन किया गया।
एसजीपीसी सदस्य भूपिंदर सिंह असंध ने आरोप लगाते हुए कहा कि बादल परिवार ने परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए पार्टी की छवि को खराब किया है। 1920 में कुर्बानियां देकर अस्तित्व में आए शिरोमणि अकाली दल को बचाने के लिए ही सभी ने दल को छोड़ने का निर्णय लिया है। पंजाब विधानसभा व लोकसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी की दुर्गति के बाद उन्होंने जमीर की आवाज पर यह कदम उठाया है।
उनका आरोप है कि एसजीपीसी प्रधान का चुनाव करने का अधिकार चयनित सदस्यों को होता है, लेकिन हमेशा उनके अधिकारों का हनन करके बादल समर्थित व्यक्ति को ही प्रधान बनाया जाता है। आरोप लगाया कि हालात यह है कि एसजीपीसी के अधीन किसी गुरुद्वारा में यदि किसी सेवादार की भी बदली करनी है तो उसके लिए एसजीपीसी प्रधान से नहीं बल्कि बादल परिवार से स्वीकृति लेनी पड़ती है।