संवाद न्यूज एजेंसी
नीलोखेड़ी। मुख्यमंत्री की घोषणा और प्रदेश सरकार की स्वीकृति के सात साल बाद नीलोखेड़ी में नई अनाज मंडी के निर्माण का कार्य शुरू हुआ है। दो चरणों में 23.5 एकड़ जमीन पर करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से मंडी तैयार होगी। जनवरी, 2027 तक काम पूरा होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि नई अनाज मंडी वर्तमान की पांच एकड़ की मंडी से नई मंडी करीब पांच गुने तक बड़ी होगी। ऐसे में भविष्य में यहां पर धान व गेहूं के सीजन में किसानों को परेशानी नहीं आएगी।
सोमवार को जीटी रोड पर बनने वाली नई अनाज मंडी के चहारदिवारी के निर्माण कार्य का शिलान्यास विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने नारियल तोड़कर किया। मनक माजरा ग्राम पंचायत की 16 एकड़ और पूजम ग्राम पंचायत की साढ़े सात एकड़ जमीन पर नई अनाज मंडी बनेगी। इसकी घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 17 सितंबर, 2018 को की थी। जिसे सरकार ने तुरंत मंजूर भी कर दिया था लेकिन लापरवाही के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
विधायक ने कहा कि नीलोखेड़ी के मध्य स्थित अनाज मंडी बेहद छोटी होने के कारण कृषि उपज को रखने में काफी परेशानी होती है। सीजन के दिनों में फसल को कर्ई सड़कों और पार्कों में डाला जाता है। इससे यातायात भी बाधित होता है। जिसके चलते नई अनाज मंडी का निर्माण बहुत जरूरी हो गया है। नीलोखेड़ी की अन्य लंबित मांगों को जल्द पूरा किया जाएगा। इस अवसर पर पूजम गांव के सरपंच सुनील जोनी शर्मा, मनकमाजरा के सरपंच वजीर चंद, मार्केट कमेटी के प्रधान शिवनाथ, उपप्रधान मलखान सिंह, जयभगवान सीकरी, मुकेश भारती, चमेल सिंह सांवत, केवल कृष्ण कुकरेजा और बलबीर मराठा मौजूद रहे।
दो चरणों में होगा निर्माण कार्य
पहले चरण में 2.75 लाख रुपये की लागत से नई अनाज मंडी की चहारदीवारी बनाई जाएगी। इसे छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब तीन करोड़ रुपये इसकी लागत आएगी। इसके अलावा मंडी के अंदर करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से आढ़तियों की करीब 110 दुकानों सहित अन्य निर्माण कार्य होंगे।
पहली मंडी थी डेढ़ एकड़ मेंआढ़ती एसोसिएशन के प्रधान बलबीर शर्मा ने बताया कि नीलोखेड़ी की स्थापना के समय रेलवे स्टेशन के समीप करीब डेढ़ एकड़ में अनाज मंडी बनार्ई गई थी। लेकिन कृषि उपज के लिहाज से वह छोटी पड़ने लगी थी। जिसके चलते 1969 में कस्बे के बीचोंबीच करीबन पांच एकड़ में मौजूदा अनाज मंडी बनार्ई गई। बीते समय में कृषि पैदावार बढ़ने से यह मंडी भी छोटी पड़ने लगी थी। पिछले दो दशकों से विभिन्न सरकारों में मंचों पर अनाज मंडी के विस्तार की मांग उठती रही है।