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Karnal News: जागरूकता के अभाव में नहीं मिलता योजनाओं का लाभ

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- जिले में 42934 मजदूर पंजीकृत, चौराहों पर खड़े होकर काम की तलाश में मजदूर
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। सरकार की ओर से मजदूरों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं मगर जागरूकता के अभाव में उन्हें इनका लाभ नहीं मिल पाता है। जिले में श्रम विभाग के अंतर्गत 42934 मजदूर पंजीकृत हैं। जिनमें से 27405 महिलाएं व 15529 पुरुष हैं।
जिले के नौ खंडों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) के तहत 164866 ग्रामीण मजदूर पंजीकृत हैं। इन मजदूरों में से अधिकतर अशिक्षित हैं। इसी कारण जो ये मजदूरी करने को मजबूर हैं वहीं ये अपने बच्चों को भी शिक्षा न दिलवाकर मजदूरी के दलदल में धकेल रहे हैं। पुरुष मजदूर अधिकतर नशे के आदी हैं। यदि इन्हें उचित जानकारी मुहैया करवाई जाए तो ये भी समाज की मुख्य धारा से जुड़कर अपनी जीवन शैली में सुधार कर सकते हैं।
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खंड अनुसार पंजीकृत मनरेगा मजदूर

खंड का नाम
पंजीकृत मजदूर

इंद्री
28496

नीलोखेड़ी 28127

निसिंग 12896

करनाल
19278

घरौंडा 17424

असंध 21047

मूनक
15557

कुंजपुरा
11052

चिड़ाव
10989

कुल
164866





कई दिन नहीं मिलता काम

मजदूर चौक पर इंद्री के गांव खेड़ा से दिहाड़ी के लिए आए मजदूर सुरेंद्र ने बताया कि अधिकतर मजदूरों को योजनाओं की जानकारी नहीं है। इस कारण वह रोजाना मजदूर चौक पर आकर दिहाड़ी की बाट देखते रहते हैं। मजदूरों को आस रहती है कि कोई आए व मजदूरी के लिए उन्हें लेकर जाए। वह रोजाना घर से अपना दोपहर का भोजन लेकर आ जाते हैं। यदि काम नहीं मिलता तो मायूस घर लौट जाते हैं।





स्थाई रोजगार की नहीं व्यवस्था

उचाना गांव से मजदूरी के लिए आए जसबीर ने बताया कि श्रमिकों के लिए कोई स्थाई रोजगार की व्यवस्था नहीं है। इस कारण से उन्हें रोजगार के लिए भटकना पड़ता है। यदि सरकार की ओर से सभी मजदूरों को महंगाई के हिसाब से मजदूरी देकर आस-पास काम उपलब्ध करवाया जाए तो मजदूरों को काम के लिए दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।



फोटो - 408

ई-श्रम कार्डों से नहीं मिल रहा लाभ

दहा बजीदा गांव से आए मजदूर विकास ने बताया कि वह आठवीं तक पढ़े हैं। सरकार की हर कल्याणकारी योजना की जानकारी रखते हैं। श्रमिकों के लिए सरकार की ओर से चलाई गई अधिकतर योजनाएं धरातल पर जीरो हैं। श्रम विभाग में भी ऐसे लोग फायदा उठा रहे हैं जिन्होंने कभी मजदूरी ही नहीं की। सरकार की ओर से करीब दो वर्ष पहले ई-श्रम कार्ड बनवाए गए थे उनका भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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बिना ब्याज ऋण उपलब्ध हो

कर्ण विहार निवासी विजय ने बताया कि यदि मजदूरों को बिना ब्याज या कम ब्याज के बैंकों की तरफ से ऋण उपलब्ध करवाया जाए तो मजदूर अपना काम खोलकर स्वावलंबी बन सकते हैं। इस कार्य के लिए सरकार की ओर से ऋण लेने पर सब्सिडी की व्यवस्था की जानी चाहिए। मजदूर को यदि अपने काम की समय पर मजदूरी भी मिल जाए तो वह अपना गुजारा सही से कर सकता है।
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