- करनाल स्टेशन पर ट्रेनें नहीं आने से यात्री परेशान, दुकानदारों व कुलियों तक का धंधा ठप
भगवान दास
करनाल। शंभु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते ट्रेनें बंद हैं जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करनाल स्टेशन पर आए दिन यात्री ट्रेनों के इंतजार में खड़े रहते हैं बाद में मायूस होकर लौट आते हैं। यही नहीं रेलवे स्टेशन पर खाने का सामान बेचने वाले, भोजन बनाने वाले दुकानदार व कुली तक परेशान हैं। उनका कहना है कि उनकी अब रोजी रोटी बंद हो गई है। धंधा ठप हो गया है।
साधन संपन्न यात्री तो टैक्सी या बस से चले जाते हैं लेकिन गरीबों के लिए ज्यादा परेशानी है। मंगलवार को कुछ यात्री कभी किसानों को तो कभी सरकार को कोसते नजर आए। एक महिला यात्री सरोज ट्रेन नहीं आने पर बस से इसलिए नहीं जा सकी, क्योंकि उसके पास बस का किराया नहीं था। - संवाद
बेटी के ससुर की मौत हो गई है...
मंगलवार सुबह 11 बजे करनाल रेलवे स्टेशन का नजारा कुछ अलग ही दिखा। पकौड़े की रेहड़ी के समीप महिला सरोज अपनी छोटी बेटी के साथ कपड़े की गठरी लेकर जमीन पर बैठी थी। कैमरे को देख सरोज ने पूछा बाबू जी पठानकोट के लिए कोई ट्रेन मिल जाएगी क्या? वहां खड़े दुकानदार ने कहा, अब नहीं मिल सकती क्योंकि किसानों ने रास्ता बंद किया है तो वो मायूस हो गई। तभी दूसरे यात्री ने पूछा क्या जाना ज्यादा जरूरी है तो बोली, बेहद जरूरी है साहब, बेटी के ससुर की मौत हो गई है, वहीं जा रही हूं।
दुकानदार ने कहा कि आप बस से चले जाओ, ये सुनकर उसकी आंखों से आंसू निकल आए। । सिसकते शब्दों में जवाब दिया कि बाबू जी ट्रेन के टिकट के पैसों का ही जुगाड़ हो पाया है। बस का किराया महंगा है, इतने पैसे उसके पास नहीं हैं। कुछ देर बैठी रहने के बाद वह कपड़े की गठरी उठाकर रेलवे स्टेशन से चली गई। रेलवे स्टेशन पर सुबह करीब 11 बजे जन शताब्दी एक्सप्रेस निकल गई तो वहा खड़ा युवक चिल्लाने लगा कि बताओ अब कैसे जाएं दिल्ली। एक तो ट्रेन मिल नहीं रही, मिल रही है तो आरक्षण नहीं है, ऐसे में यात्री क्या करें। जन शताब्दी ट्रेन में सामान्य टिकट पर यात्री यात्रा नहीं कर पा रहे हैं। अब विकास को मजबूरी में बस से दिल्ली जाना पड़ा।
दिल्ली शिफ्ट करने की मांग
कई दिनों से किसानों के रेलवे ट्रैक जाम करने के चलते जहां दुकानदारों, रिक्शा चालकों और ऑटो चालकों को परेशानी हो रही है। वहीं सबसे बड़ी परेशानी रेलवे स्टेशन पर बोझ उठाने वाले चार कुली को भी है। कुली कर्मचंद, संजीव, सुरेश और भीमसेन ने बताया कि पिछले कई दिनों से यात्री न आने से कमाई का कोई दूसरा जरिया नहीं है। ऐसे में राशन भी उधार ले रहे हैं और बच्चों की फीस भी नहीं जमा करवा पाए। ऐसे में कुलियों ने सीनियर डीसीएम नई दिल्ली को पत्र लिखकर नई दिल्ली या उसके पास के स्टेशन पर दो कुलियों को काम करने की अनुमति प्रदान करने की मांग की है।