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एससी एक्ट में अभी बहुत सी खामियां : ईश्वर

Sat, 04 Jul 2015 12:16 AM IST
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों के साथ जीते जी भी भेदभाव किया जाता है और मरने के बाद भी। यह पूरी तरह बंद होना चाहिए, मरने के बाद भी ये लोग भेदभाव का दंश झेलते हैं। चूंकि उनके लिए अलग से श्मशान घाट होते हैं।
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उन्होंने कहा कि ऐसा कानून हर प्रदेश में बनाया जाए कि मरने के बाद तो समाज के लोगों के साथ समान व्यवहार हो, सबके लिए एक ही श्मशान घाट होने का कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एससी एक्ट अधूरा है और इसमें बहुत सी खामियां हैं। खामियों को दूर किया जाना चाहिए, ताकि एससी समाज के लोग बराबर जीवन जी सकें।
वे शुक्रवार को विकास सदन में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

मिर्चपुर कांड पर बोलते हुए ईश्वर सिंह ने कहा कि वहां के लोग आज भी भयभीत हैं और वहां से पुलिस प्रशासन को नहीं हटाने के पक्ष में हैं। प्रेस वार्ता के दौरान ईश्वर सिंह ने कहा कि अधिकारियों की बैठक में मुझे जानकारी मिली है कि 100-100 गज के जो प्लाट गरीब लोगों के लिए काटे गए थे, उन पर किसी दबंग ने कब्जा नहीं किया है। यह एक अच्छी बात है। उन्होंने बताया कि करनाल में यह आयोग की पहली समीक्षा है। अन्य जिलों में भी यह समीक्षा की जाएगी।
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सरकारी स्कूलों में 46 प्रतिशत बच्चे शेड्यूल कास्ट के...
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 46 प्रतिशत बच्चे अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। यह एक गंभीर समस्या है। इस तरह सवर्ण जाति के बच्चों व अनुसूचित जाति के बच्चों के बीच खाई पैदा होती जा रही है। यह समस्या तभी दूर होगी जब अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे। इसके लिए राजनेताओं को कानून बनाना चाहिए कि हर अधिकारी के बच्चे सरकारी स्कूल में जरूर पढ़ें। अमेरिका में भी यह कानून है कि बच्चे उसी स्कूल में पढ़ेंगे जोकि उसके घर के बिल्कुल नजदीक हों। यह स्कूल बदलना है तो स्कूल के पास रेजिडेंस होना चाहिए। इस तरह का कानून भारत सरकार को भी बनाना चाहिए। ईश्वर सिंह ने कहा कि भारत में शिक्षा का अधिकार नियम पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है। इसलिए उन्होंने भारत सरकार को एक सप्ताह पहले पत्र लिखा है।
चंडीगढ़ में नहीं एक भी मामला
उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि पिछले दो सालों में चंडीगढ़ में अनुसूचित जाति एक्ट के अनुसार कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। इसी तरह का वातावरण अन्य राज्यों में भी होना चाहिए। यही पढ़े लिखे समाज की पहचान भी है। हरियाणा में यह 9.52 है और पंजाब में 0.80। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में शायद पुलिस मामला दर्ज नहीं करती, इसलिए पंजाब का यह रेशो कम है।
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