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ईश्वर की क्लास में अफसरों की बोलती बंद

Sat, 04 Jul 2015 12:13 AM IST
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो
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राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने जिले में प्रशासन की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए चलाई जा रही स्कीमों की पोल खोलकर जनता के सामने रख दी। पूरी तैयारी के साथ पहुंचे ईश्वर सिंह के सामने अधिकारी आननफानन में बिना होम वर्क किए बैठक में पहुंचे।
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इतना ही नहीं डीसी से लेकर डीएसपी और डीईओ से लेकर समाज कल्याण अधिकारी तक के पास उनके सवालों के जवाब नहीं थे। करनाल में आने पर पायलट गाड़ी नहीं मिलने पर गुस्साए सदस्य ने सभी अधिकारियों की जबरदस्त खिंचाई करते हुए एक मामले में डीएसपी व डीईओ को रिकार्ड के साथ दिल्ली तलब किया।

साथ ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृह सचिव को भी पत्र लिख डाला। उन्होेंने यह भी चेताया कि वे इस तरह का ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं करेंगे। दरअसल सुबह साढ़े दस बजे आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह विकास भवन पहुंचे। दिल्ली से करनाल पहुंचे ईश्वर सिंह की गाड़ी के आगे प्रोटोकाल के हिसाब से पायलट गाड़ी लगनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। ऐसे में सबसे पहले सदस्य ने डीसी की क्लास ली और पायलट गाड़ी नहीं मिलने पर कारण पूछा? डीसी द्वारा इंद्रधनुष की मीटिंग का हवाला देने पर सदस्य ने कहा कि ये मीटिंग जरूरी थी या वो। इस पर भी डीसी कोई जवाब नहीं दे पाए। जनता से रूबरू होने के बाद उन्होंने अन्य अधिकारियों के बारे में पूछा तो आननफानन में अन्य अधिकारियों को विकास भवन में बुलाया गया।
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होम वर्क नहीं करके आईं डीईओ मैडम, दिल्ली तलब
बैठक के दौरान उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से पूछा की जिले में इस वर्ष  सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों की संख्या कितनी है? कितने बच्चों को कितना स्टाइफंड दिया गया है। कितने बच्चों को मुफ्त साइकिल और वर्दियां दी गई हैं? इस बारे में पिछले तीन साल का रिकार्ड बताएं। शुरू में जिला शिक्षा अधिकारी पहले तो सही जवाब नहीं दे सकीं। फिर उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिला के सरकारी स्कूलों में अनुसूचित जाति के बच्चों की दाखिला लेने की संख्या पिछले वर्ष से ज्यादा है। डीईओ आशा मुंजाल ने बताया कि जिला में नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं में इस समय अनुसूचित जाति के लड़कों की संख्या 6218 जबकि लड़कियों की संख्या 6400 है। उन्होंने डीईओ से कहा कि आप मीटिंग में होमवर्क नहीं करके आई हैं। आपकी सूचनाएं अधूरी हैं। सोमवार तक पूरा रिकार्ड लेकर दिल्ली कार्यालय में रिपोर्ट करें।
जिला समाज कल्याण अधिकारी पर जताई नाराजगी
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी से अनुसूचित जाति के बच्चों को दी जा रही सुविधा और स्कीमों के बारे में ईश्वर सिंह ने जानकारी मांगी तो वे अपने विभाग की जानकारी भी पूरी तरह से नहीं दे सके। इस पर सदस्य ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मीटिंग को लेकर आपकी तैयारियां पूरी नहीं है और आपको पूरी तरह से अपडेट होना चाहिए।
27 गांवों में एससी को नहीं मिले हैं प्लॉट
आयोग सदस्य ईश्वर सिंह ने डीडीपीओ से पूछा की आपके जिले में ऐसे कितने गांव हैं, जिसमें 100-100 गज के प्लॉट नहीं दिए गए हैं? इस पर डीडीपीओ ने बताया कि जिले में 436 गांव हैं 409 गांव में संबंधित परिवार थे। इनमें से 316 गांव में प्लॉट दिए जा चुके हैं, 27 गांवों में योग्यता पूरी नहीं करने के चलते प्लॉट नहीं दिए गए हैं, जबकि 93 गांव में शामलात जमीन न होने के कारण नहीं दिए जा सके। इस प्रकार जिला में 32 हजार 501 परिवारों को प्लॉटों का कब्जा भी दिया जा चुका है। इस प्रकार यह काम लगभग 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने नगर निगम के सचिव से सफाई कर्मचारियों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। कहा किकर्मचारियों को सीधा वेतन मिलना चाहिए किसी बिचौलिए या ठेकेदार के माध्यम से नहीं। उन्होंने हरिजन कल्याण निगम द्वारा संबंधित लोगों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी मांगी।

डीएसपी को बोले, ऐसा नहीं चलेगा
आयोग सदस्य ने डीएसपी हेडक्वार्टर राजेश लौहान से पूछा की अब तक कितने रेप के मामले हुए हैं और कितने सुलझाए हैं और कितनों को हर्जाना दिया गया है। इस पर डीएसपी द्वारा सही जवाब न मिलने के कारण तल्खी जाहिर करते हुए सदस्य ने कहा कि ये नहीं चलेगा, आंकड़ों की बजाय काम दिखना भी चाहिए। उन्होंने इस मौके पर जिला न्यायवादी से भी जिला में एससी के लोगों से संबंधित न्यायालय में चल रहे तथा निपटाए जा चुके मामलों की जानकारी ली। जिला न्यायवादी ने बताया कि एससी से संबंधित 18 मामले न्यायालय में विचाराधीन है।

बैठक का प्रचार प्रसार न होने पर भी जताई नाराजगी
करनाल। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य एवं पूर्व सांसद ईश्वर सिंह ने शुक्रवार को करनाल के अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। मौके पर डीपीआरओ को न पाकर पूर्व सांसद भड़क गए और मौजूद एपीआरओ से पूछा कि डीपीआरओ क्यों नहीं आए? पूर्व सांसद ने यह भी पूछा कि जब मैंने अपने आने की सूचना 20 जून को दे दी थी तो अब तक उसका प्रचार क्यों नहीं हुआ? जनता तक सूचना क्यों नहीं गई? प्रशासनिक अधिकारी उन्हें कोई सटीक जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने डीसी और डीपीआरओ को जवाब देने को कहा है। सुबह साढ़े 10 बजे विकास भवन में पहुंचना था। वे अपने निर्धारित समय पर पहुंच भी गए, लेकिन उन्हें प्रशासन की ओर से कोई भी पायलट गाड़ी मुहैया नहीं कराई गई।

एसपी क्यों नहीं आए
विकास भवन में मौजूद डीएसपी हेडक्वार्टर राजेश कुमार से ईश्वर सिंह ने पूछा कि आप कौन हैं? डीएसपी ने खुद का जैसे ही परिचय दिया तो ईश्वर सिंह ने पूछा कि एसपी क्यों नहीं आए? इस पर डीएसपी ने बताया कि करनाल का अतिरिक्त चार्ज कुरुक्षेत्र के एसपी के पास है।
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