करनाल। हरियाणा सहित देश के कई राज्यों में मिट्टी लवणग्रस्त हो रही है। लंबे समय से मृदा लवणता को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद एक ताजा अनुमान के मुताबिक हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित 16 राज्यों की भूमि में 35 प्रतिशत तक लवणता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हरियाणा के मध्यक्षेत्र जहां नहरी सिंचाई अधिक है, वहीं भी तेजी के साथ मिट्टी लवणीय हो रही है, जो चिंता का विषय है। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के निदेशक डॉ. आरके यादव ने बताया कि लवणीय और क्षारीय भूमि का मानचित्र 1997 में तैयार कराया गया था, जो वर्ष 2001 में जारी हुआ। जिसके आधार पर देश में 70 लाख हेक्टेयर जमीन लवणीय पाई गई थी।
इसे सुधारने के लिए जिप्सम, उप सतही जलनिकास प्रणाली सहित कई तकनीक विकसित की गई। जिसके माध्यम से पिछले 25 सालों में करीब 22 लाख हेक्टेयर भूमि में सुधार किया गया, जिससे देश को 180 लाख टन का अतिरिक्त फसलोत्पादन मिलने लगा। लेकिन अब एक बार फिर लवणीय-क्षारीय भूमि का मानचित्र तैयार हो रहा है।
इनमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, उड़ीसा व आंध्रप्रदेश जैसे नौ राज्यों में लवणता अध्ययन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, शेष राज्यों में सर्वे अभी चल रहा है, इसके बाद ही पूरा मानचित्र तैयार किया जा सकेगा।
निदेशक डॉ. आरके यादव ने बताया कि अब तक जिन नौ राज्यों का सर्वे किया गया है, उनकी रिपोर्ट चौंकाने वाली हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि देश में लवणीय भूमि का क्षेत्र 70 लाख से बढ़ कर 160 लाख हेक्टेयर हो सकता है, ये फैलाव 35 प्रतिशत के करीब है। लवणता बढ़ने के कारण भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और पैदावार घटने लगती है। पौधों की वृद्धि बाधित हो जाती है। भूमि बंजर होने की ओर अग्रसर हो जाती है।