करनाल। हर चेहरे पर उदासी, जुबां धान खरीद 11 अक्तूबर से शुरू करने के सरकार के फैसले को कोस रही थी। बेबस निगाहें कभी मंडी में लगी अपनी मेहनत की ढेरियों पर तो कभी बारिश में भीगते धान पर ठहर रही थी। वहीं कभी अपनी आढ़तों पर बैठे आढ़तियों को देख रहे थे जो धान आते ही खरीदने के लिए आतुर थे। यही स्थिति अनाज मंडी में मौजूद हर किसी की थी। उम्मीद थी कि जो फसल वह कटवाकर मंडी में लेकर आए हैं, वह आज एमएसपी पर बिक जाएगी। जिससे वह अपना कर्ज उतार सकेंगे। लेकिन सरकार के एक फैसले ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
धान खरीद 11 अक्तूबर से करने का फैसला देर रात आया तो यह खबर शायद किसानों तक नहीं पहुंच पाई, यही कारण रहा कि करनाल सहित जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में सुबह से बड़ी संख्या में किसान धान लेकर पहुंच गए। जिससे मंडी गेट के कांटों पर ट्रैक्टर ट्रालियों की लाइनें लग गईं। वैसे भी किसानों ने एक अक्तूबर से खरीद शुरू होने की सूचना पर पहले से ही कंबाइन व ट्रैक्टर ट्राली बुक करके कटाई कराकर धान को ट्रालियों में भर लिया था। जो सुबह चार बजे से ही मंडियों की ओर चल दिए। सुबह होते होते करनाल अनाज मंडी के मुख्य गेट के कांटे पर लंबी लाइनें लग गईं। लगभग यही स्थिति जिले की कुछ अन्य मंडियों में भी देखी गई। लेकिन मंडी पहुंचकर किसानों के होश उड़ गए जब पता लगा कि उनका धान आज नहीं खरीदा जाएगा। ट्रालियां किराए की थी, सो मंडी परिसर में ही ढेरी लगा दी। उनकी रखवाली करने में जुट गए। दोपहर बाद बारिश से कुछ लोगों ने आढ़तियों से त्रिपाल आदि लेकर किसी तरह धान को भीगने से बचाने का प्रयास किया लेकिन अधिकांश धान भीग गया।
पीआर धान को नहीं मिले खरीदार, 1509 भी धड़ाम
करनाल। धान की खरीद तिथि आगे बढ़ने से सबसे बड़ा नुकसान किसानों को पहुंचा। पीआर धान को तो किसी ने पूछा ही नहीं। किसी ने भाव लगाया तो सिर्फ 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल। पिछले एक महीने से 3100-3200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा 1509 बासमती किस्म के धान के भाव भी 2500-2600 रुपये तक आ गए। इसका मुख्य कारण यह रहा कि मंडी में धान की अधिकता हो गई।
इसका फायदा राइस मिलर्स ने उठाया, क्योंकि हर साल मिलर्स और आढ़ती 15 सितंबर से 5 अक्तूबर तक किसी न किसी बहाने हड़ताल आदि कर खरीद प्रभावित करते हैं। मजदूर भी आढ़तियों के इशारे पर काम करते हैं, इसलिए वह भी हर साल आढ़तियों व मिलर्स का साथ देते हैं ताकि इन 20 दिनों के सुनहरे मौके पर किसानों की मजबूरी का जमकर फायदा उठाया जा सके। उनके धान को औने पौने दामों पर खरीदा जा सके।
1509 धान का बड़ा कारोबार जिले में होता है, इसे राइस मिलर्स खरीदकर करोड़ों के मुनाफे का कारोबार करते हैं। यह मौका सरकार ने राइस मिलर्स को दे दिया है। यही कारण रहा कि 1509 धान की भाव में 500 से 700 रुपये तक गिर गए हैं। पीआर धान, जिसका सरकारी भाव 1940 व 1960 रुपये हैं, उसके लिए आज कोई खरीदार नहीं मिला। यदि कोई खरीदार आया तो उसने 1500 या 1600 रुपये प्रति क्विंटल का भाव लगाया। राइस मिलर्स या आढ़ती यह बखूबी जानते हैं कि किसान इस धान को अधिक दिन नहीं रोक सकता, किसानों को एक दो दिन में धान को किसी भी कीमत पर बेचना ही होगा।
ईश्वर रहम करो...
करनाल। जब आसमान पर काले बादल छाए तो किसानों की धड़कने तेज हो गई। करीब 3 बजे बारिश हुई तो किसान हाथ जोड़कर प्रार्थना करते नजर आए। कम किसानों के पास ही पॉलिथीन, त्रिपाल आदि थे, किसी ने आढ़तियों से लिए लेकिन अधिकांश धान भीग गया। किसान अपने सामने ही अपने मेहनत की कमाई को बारिश में बहते देखते रहे। गनीमत रही कि बारिश कुछ देर ही हुई। उसके बाद धूप खिल गई लेकिन नमी बढ़ना स्वाभाविक है।
आखिर मेरा क्या कुसूर
दो दिन से धान लेकर अनाज मंडी में पड़े हैं, पहले बताया कि 25 सितंबर से खरीदेंगे, फिर कहा एक अक्तूबर से खरीदेंगे, अब कह रहे 10 दिन बाद खरीदेंगे, हमारे धान का क्या होगा। आखिर इसमें मेरा क्या कुसूर है।
ओमप्रकाश, किसान शेखूपुरा
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चौबीस घंटे बाद खराब होने लगेगी फसल
यदि सरकार को धान की खरीद नहीं करनी थी तो दो तीन दिन पहले बताना चाहिए था, कम से कम हम धान की कटाई तो न कराते। अब कटा हुआ धान 24 घंटे बाद खराब होने लगेगा।
शादुद्दीन, किसान, बिराला (शामली)
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धान खराब होगा तो जिम्मेदार कौन
- पहले तो बारिश ने मार दिया, अब सरकार धान खरीदने को तैयार नहीं है। आज फिर मंडी में धान भीग गया है। जो अब खराब हो जाएगा। आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा।
- बूटा सिंह, किसान फरल
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कौन ऐसी सलाह दे रहा
सरकार शायद किसानों को बर्बाद करना चाहती है, कर्ज लेकर कड़ी मेहनत करके फसल पैदा की है, अब सरकार खरीदने को तैयार नहीं है। न जाने सरकार को ऐसी सलाह कौन दे रहा है।
निर्मल सिंह, किसान फरल