सरकार द्वारा हरियाणा ग्रामीण विकास निधि (एचआरडीएफ) को 0.5 से बढ़ाकर दो प्रतिशत करने के बाद अब किसानों की फसल खरीदने पर सरकार को मार्केट फीस सहित कुल चार फीसदी कर चुकाना होगा। ये स्थिति तीन कृषि कानूनों से पहले की है, जो अब पुन: बहाल हो गई है। उधर, राइस मिलर्स और आढ़तियों का मानना है कि इसका सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ेगा, उनकी फसल पहले की अपेक्षा सस्ती बिक सकती है। राइस मिलर्स ने बढ़े टैक्स को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
तीन कृषि कानून बनने से पहले यानी करीब डेढ़ साल पहले तक दो प्रतिशत मार्केट फीस व इतना ही एचआरडीएफ भी देना होता था। जब तीन कृषि कानून बने तो उसमें निहित पूरे देश में एक प्रतिशत टैक्स के प्रावधान के अनुसार मार्केट फीस को 0.5 प्रतिशत व एचआरडीएफ को 0.5 प्रतिशत करके कुल टैक्स एक प्रतिशत कर दिया था। पिछले धान के सीजन में मार्केट शुल्क को तो 0.5 प्रतिशत से बढ़ाकर दो प्रतिशत कर दिया था लेकिन एचआरडीएफ 0.5 प्रतिशत ही था, इसलिए राइस मिलर्स आदि को 2.50 प्रतिशत टैक्स देना पड़ा था लेकिन अब सरकार ने एचआरडीएफ को भी दो प्रतिशत कर दिया है। अनाज मंडी करनाल के सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि अब एचआरडीएफ को 0.5 प्रतिशत से बढ़ाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी ने राइस मिलर्स की चिंता बढ़ा दी है। राइस मिलर्स हों या फिर आढ़ती, उनका मानना है कि यदि टैक्स कम होता है तो चोरी छिपे फसल की खरीद फरोख्त काफी कम हो जाती है। इसलिए सरकार का टैक्स बढ़ जाता है लेकिन टैक्स अधिक होने पर मार्केट कमेटी के अधिकारियों की मिलीभगत से खरीद में चोरी बढ़ जाती है, जिससे सरकारी टैक्स बढ़ने की बजाय और कम हो जाता है।
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-कोई भी व्यापारी घाटे में तो काम करेगा नहीं, परिणाम यह होगा कि इसका खामियाजा भी किसानों को भी भुगतना होगा। उनकी फसल कम रेट पर बिकेगी। राइस मिलर्स को पहले से ही घाटा हो रहा है, जो धान मिलर्स ने 3400 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी थी, वह अब 3000 से 3200 के करीब बिक रही है। सरकार को बढ़ाया गया एचआरडीएफ तत्काल वापस लेना चाहिए।
विनोद कुमार गोयल, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष हरियाणा राइस एंड डीलर्स एसोसिएशन।
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-टैक्स जब भी बढ़ता है, तो उसका मार अंत में तो किसान पर ही पड़ती है, क्योंकि व्यापारी तो टैक्स व अपना मुनाफा निकाल कर ही फसल खरीदेगा। अन्य राज्यों का व हरियाणा का चावल तो बराबर रेट में बिकेगा लेकिन हरियाणा में लागत अधिक आएगी तो स्वाभाविक है कि किसान को कम रेट मिलेगा। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
-नरेश बंसल, प्रधान दि तरावड़ी राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन।
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-मार्केट शुल्क व एचआरडीएफ दोनों ही तीन कानून बनने से पहले की स्थिति में आ गए हैं, नए कानूनों में देशभर में एक प्रतिशत टैक्स की व्यवस्था थी। इसका धान या गेहूं की खरीद पर तो कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन फर्जी खरीद व टैक्स चोरी की आशंका बढ़ जाएगी। यदि अब कोई फसल 3000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जाती है, तो उस पर 120 रुपये तो टैक्स ही देना होगा।
-राज कुमार सिंगला, उप प्रधान अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन करनाल।