करनाल। केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। खासकर मेडिकल उपकरणों और दवाओं पर जीएसटी में राहत, निजी डॉक्टरों के लिए और आयुष्मान भारत योजना में वार्षिक व्यय वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। निजी अस्पतालों के स्वास्थ्य चिकित्सकों का कहना है कि अगर बजट में इन पहलुओं को ध्यान में रखा जाए तो मरीजों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा। वहीं, निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए आर्थिक राहत और सामाजिक सुरक्षा के इंतजाम से स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। जिला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देने की मांग की।
- मेडिकल उपकरण में घटे जीएसटी
मेडलाइन अस्पताल से एमएस व ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कुमार विभव ने कहा कि मेडिकल उपकरण और दवाओं पर जीएसटी दर में कमी से निजी डॉक्टरों और छोटे अस्पतालों को वित्तीय राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान योजना के लिए बजट में प्रावधान हो ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिले।
- वित्तीय संसाधन बढ़ाने की जरूरत
श्रीराम चंद्र मेमोरियल अस्पताल के एमडी व फिजिशियन डॉ. कमल चराया ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना को और अधिक टिकाऊ और व्यापक बनाने के लिए बजट का पर्याप्त आवंटन होना चाहिए। जो बकाया है वो मिलना चाहिए। योजना के सुचारू संचालन के लिए सरकार को वित्तीय संसाधन बढ़ाने चाहिए।
- वार्षिक व्यय बढ़ाना जरूरी
रजत मिमानी अस्पताल से बाल रोग चिकित्सक डॉ. रजत ने कहा कि निजी अस्पताल जो आयुष्मान योजना से जुड़े हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य बजट व वार्षिक व्यय बढ़ाना जरूरी है। यदि प्रति अस्पताल खर्च बढ़ेगा, तो अस्पताल बेहतर सेवा और सुविधाएं उपलब्ध करा पाएंगे, जिससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ाएं योजना
रावल अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. नेत्रपाल रावल ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देने से न केवल अस्पतालों को वित्तीय राहत मिलेगी बल्कि मरीजों को भी बेहतर और किफायती इलाज की सुविधा मिलेगी। लोगों को और अधिक लाभ के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में योजनाओं को बढ़ाना चाहिए।