राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित कार्यक्रम का दीप जलाकर शुभारंभ करते कुलपति डॉ. धीर
करनाल। किसान सारथी कोष का इस्तेमाल करके पशुपालन की सलाह बनाने पर राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के डॉ. एनएन दस्तूर ऑडिटोरियम में शुक्रवार को एक राष्ट्रीय कार्यशाला हुई। एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने भारत के पशुधन क्षेत्र को मजबूत बनाने में भरोसेमंद डिजिटल सलाह प्रणाली की अहम भूमिका पर जोर दिया।
डॉ. सिंह ने कहा कि किसान सारथी भारत का प्रमुख डिजिटल कृषि-सलाहकार स्थान है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और आईसीएआर के तहत लॉन्च किया गया। यह प्लेटफॉर्म 700 जिलों में तीन करोड़ से ज्यादा किसानों को 13 क्षेत्रीय भाषाओं में बहुभाषी सलाह के जरिए जोड़ता है। इसमें मौसम की जानकारी, बाजार की जानकारी और 730 से ज्यादा कृषि विज्ञान केंद्रों, 100 से ज्यादा आईसीएआर संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों से विशेषज्ञ सलाह शामिल किया गया है। किसान सारथी जैसे डिजिटल स्थान तभी बड़े बदलाव ला सकते हैं, जब सलाह वैज्ञानिक रूप से मान्य हों, नियमित रूप से अपडेट की जाएं और बड़े पैमाने पर फैलाई जाएं।
डेयरी विस्तार प्रभाग के प्रमुख डॉ. गोपाल सांखला ने पशुपालक किसानों की रीयल-टाइम (वर्तमान) चुनौतियों से निपटने में डिजिटल उपकरण के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। सहायक महानिदेशक डॉ. अनिल राय ने किसान सारथी को एक, दो-तरफा संचार मंच के रूप में पेश किया।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार और किसान सारथी 2.0 के प्रधान अन्वेषक ने प्लेटफॉर्म के तीन-स्तरीय कॉल प्रवाह, मल्टी-चैनल सेवाएं, फोटो-आधारित न्यूज, 13 क्षेत्रीय भाषाओं के लिए समर्थन और केवीके विशेषज्ञों द्वारा स्थानीयकरण के बारे में बताया। डॉ. राजन शर्मा, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) ने अपनाने को बढ़ाने के लिए दो मिनट के समस्या-समाधान वीडियो जैसे संक्षिप्त, व्यावहारिक कंटेंट की वकालत की जबकि संयुक्त निदेशक डॉ. एके सिंह ने वैज्ञानिकों, छात्रों और प्रगतिशील किसानों के माध्यम से लगातार अद्यतन करने का आह्वान किया।