फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निर्दोष को सजा से सभ्य समाज के लिए गंभीर परिणाम : कोर्ट

Wed, 15 Apr 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


करनाल। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी उदित अग्रवाल की अदालत ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी तरुण साहनी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एक निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से सजा देना सभ्य समाज के लिए गंभीर परिणाम वाला होता है। इसलिए संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी किया जाता है।

अदालत के फैसले के मुताबिक, शिकायतकर्ता महिला ने थाना शहर पुलिस को शिकायत दी थी कि 29 मई, 2022 को नूर महल होटल में एक फैशन शो आयोजित किया गया था। उन्होंने अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी। इन पर तरुण साहनी ने बेहद आपत्तिजनक और झूठी टिप्पणियां की थीं। आरोपी ने एक आपत्तिजनक लिंक भी साझा किया था। इससे शिकायतकर्ता की सामाजिक छवि खराब हुई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि जब उसने इस बारे में आरोपी से आपत्ति जताई तो उसने जान से मारने की धमकी दी।
विज्ञापन

इस शिकायत पर पुलिस ने 5 अगस्त, 2022 को थाना शहर में मानहानि और जान से मारने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। अदालत ने 17 पृष्ठों के विस्तृत निर्णय में अभियोजन पक्ष की कमियों को उजागर करते हुए दर्शाया कि पुलिस जांच के दौरान न तो कोई मोबाइल फोन जब्त किया गया और न ही कोई मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे सीडी या पेन ड्राइव) अदालत में पेश किया गया। केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
कोई गवाह नहीं पेश किया
अदालत में जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने न तो उस स्थान का दौरा किया जहां फैशन शो हुआ था और न ही विवादित टिप्पणियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की। इसके अलावा मामले में व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन या अन्य सदस्यों, जिन्होंने कथित तौर पर पोस्ट देखी थी, उनमें से किसी को भी गवाह के तौर पर शामिल नहीं किया गया।
विज्ञापन

दोनों पक्षों में चल रहे मुकदमे
अदालत में जिरह के यह सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच पहले से ही दीवानी मुकदमे चल रहे थे, इससे झूठी शिकायत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ धारा 500 (मानहानि) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें