इसका बड़ा फायदा ये होगा कि गन्ने की ये किस्में बिजली उत्पादन में तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी ही, साथ ही पेपर उद्योग और प्लाईवुड उद्योग के लिए वरदान साबित होगी। डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि गन्ने के बैगास आदि से पेपर बनने लगा है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले प्लाईवुड बोर्ड आदि का निर्माण होगा। इसका सीधा उपयोग बॉयोरिफाइनरी में होगा और हाईड्रोजन गैस उत्पादन में भी किया जाएगा।
भोजन के बाद थाली, प्लेट, चम्मच को भी खा सकेंगे
जिस थाली, प्लेट, कटोरी और चम्मच से हम लोग भोजन करते हैं, आने वाले दिनों में भोजन के बाद उन थाली, प्लेट, चम्मच आदि को भी खा लिया जाएगा। यूं तो ये तकनीक पहले ही विकसित की जा चुकी हैं, कुछ संस्थानों, कंपनियों ने गेहूं के भूसे आदि से ऐसे खाद्य बर्तन बनाए हैं, लेकिन अब ऐसे बर्तनों को गन्ने के बैगास आदि से बनाने की तकनीक पर गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर व करनाल ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर, दोगावरी इंडस्ट्री कर्नाटक, करूर में तमिलनाडु पेपर मिल, केपीआईटी टेक्नोलॉजी पुणे (महाराष्ट्र) आदि के सहयोग से इस तकनीक पर शोध कार्य किया जा रहा है। इसके बाद ही गन्ने से जैम, जैली, आइसक्रीम, सीरप आदि भी अधिक मात्रा में बनेंगे।
गन्ने को औद्योगिक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका फायदा उद्योगों को तो होगा ही, साथ ही इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को भी होगा, क्योंकि जितना अधिक गन्ने का उपयोग बढ़ेगा, उतनी ही गन्ने की मांग भी बढ़ेगी। इसके लिए किसानों को अधिक गन्ना पैदा करना होगा, किसानों को गन्ने की कीमत भी अच्छी मिलेगी। जिससे किसानों की आय में भी इजाफा होगा। ये शोध मानवीय स्वभाव में बदलाव का साक्षी तो होगा ही, साथ ही पौष्टिक भी होगा, क्योंकि इससे खाने वाले के शरीर में फाइबर की पूर्ति होगी। गन्ना प्रजनन संस्थान ने गन्ने से निर्मित बिस्कुट को तैयार कर लिया है। - डॉ. एसके पांडेय, वरिष्ठ वैज्ञानिक, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, गन्ना प्रजनन संस्थान करनाल।