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Agriculture: गन्ने को भी भेदने लगा धान व गेहूं में लगने वाला गुलाबी छिद्रक कीट

Mon, 31 Jan 2022 04:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह कर्मबीर लाठर, संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)

सार

अनुसंधान वैज्ञानिकों ने पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में इस नए कीट को पकड़ा है। यह कीट भविष्य में फसल को अधिक क्षति पहुंचा सकता है।
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गन्ने की फसल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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उत्तर भारत के पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश व हरियाणा में गन्ने की फसल में नए कीट ‘पिंक बोरर’ (गुलाबी छिद्रक) की पहचान की गई है। गौण श्रेणी का यह कीट धान व गेहूं की फसल में लगने वाला छिद्रक कीट है। गन्ना फसल पर इसका प्रभाव नहीं था किंतु पिछले तीन वर्षों में इसने गन्ने को भी निशाना बना लिया। पहले वर्ष इसका कम असर नगण्य रहा लेकिन पिछले दो वर्षों से इसका प्रादुर्भाव बढ़ रहा है। जांच में यह खेत में पैच रूप में पाया गया। भविष्य में इस कीट से फसल को अधिक क्षति पहुंचने की संभावना है।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. एसके पांडे ने फसल में इस कीट के जीवन चक्र व प्रभावों की जांच की है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा छिद्रक कीट है जो फसल में नीचे से ऊपर तक हर भाग में पाया गया है। उन्होंने किसानों को इस कीट के लक्षण व प्रबंधन के उपाय बताए हैं। 

ये पाए गए हैं लक्षण 

  • गन्ने की सूट अवस्था (जमाव के तुरंत बाद पोरियां बनने से पूर्व तक) यह क्षति करता है। पोरियां बनने के बाद उनमें छेद करता है। अगोले वाले भाग में भी क्षति करता है। इससे मध्य कलिका सूख जाती है। 
  • पोरी बनने से पूर्व परोहा अवस्था में असर करता है। जिससे बीच की कलिका मृत हो जाती है। ग्रसित पौधे की बढ़वार रुक जाती है। 
  • पोरी बनने के उपरांत उनकी गांठों के पास चारों तरफ छेद बनाकर खाता हुआ अंदर प्रवेश करता है। गांठों के चारों ओर भीतर का हिस्सा खा जाता है। जिससे हवा के झाेंके या हल्के झटके से गन्ना टूटकर गिर जाता है। नीचे के शेष पौधे की आंखें फुटाव करती हैं और गन्ना खत्म हो जाता है। 
  • अक्तूबर में सरदकालीन बिजाई से इस कीट का प्रकोप शुरू हो जाता है। मुख्य फसल के अलावा मोढ़ी फसल में भी यह असर करता है। 
  • गन्ने की सीओ-0118 व सीओएच-160 प्रजाति में इसका प्रकोप देखने को मिला। 

 

नियंत्रण के उपाय 

  • स्वस्थ गन्ना बीज का चयन करें। 
  • ग्रसित गन्ने में कोई छिद्रक कीट प्रभावित पोरियां हों तो उन्हें निकाल दें। 
  • बिजाई के समय गन्ना बीज पर क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत तरल कीटनाशी दवा 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें और ऊपर से मिट्टी ढक दें। 
  • दो महीने की फसल होने के उपरांत फिर यही छिड़काव करना है जिससे कीट (नर व मादा) खत्म हो जाएंगे। 
  • यदि आसपास के सभी किसान मिलकर एक साथ छिड़काव करें तो अच्छा रहेगा 
  • अप्रैल में खेत में इस कीट के अंड परजीवी ट्राइकोग्रामा निलोकिस को 15 दिन के अंतराल में खेत में छोड़ते रहें। ये अंड परजीवी हरियाणा की शाहबाद, महम व जींद की सहकारी चीनी मिलों में मिलते हैं। 
  • समय-समय पर खेत में पाए जाने वाले ग्रसित पौधों को बाहर निकालते रहें।
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