करनाल। दवाइयां भले ही भारत में बन रही हों, लेकिन इनका 70 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आयात किया जाता है। अब केंद्र सरकार ने पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों को कम करने का प्रयास तो किया, लेकिन दवाइयों के रॉ मैटेरियल और पैकिंग मैटेरियल में करीब 40 फीसदी तक की महंगाई ने जीवन रक्षक दवाइयों के दामों में 25 से 35 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। जिसका सीधा असर अस्पतालों में उपचार कराने पहुंच रहे मरीजों व उनके तीमारदारों की जेब पर पड़ रहा है। जिससे इलाज कराना महंगा हो गया है।
कृषि यंत्र निर्माण इंडस्ट्री के बाद जिले की दूसरी सबसे बड़ी इंडस्ट्री फार्मा ही है। जिले में 25 एलोपैथिक और करीब 60 आयुर्वेदिक दवाएं बनाने की फैक्टरियां हैं। दवाइयां बनाने का 70 प्रतिशत रॉ मैटेरियल चीन आदि देशों से आयात किया जाता है। रूस व उक्रेन युद्ध का प्रभाव भी इस पर पड़ा है। यही कारण है कि दवा निर्माण में प्रयोग होने वाला रॉ मैटेरियल सिर्फ एक साल में ही 35 से 40 प्रतिशत महंगा हो चुका है।
मुख्यमंत्री से मिलेंगे
दवाएं जीवनरक्षक होती हैं, दवा उत्पादन में देश आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी 70 प्रतिशत रॉ मैटेरियल चीन से ही आयात करना पड़ता है। प्रदेश में करीब 350 दवा बनाने की फैक्टरियां हैं। रॉ मैटेरियल महंगा होने से दवाओं के दाम में 25 से 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। साथ ही पैकिंग मैटेरियल भी काफी महंगा हो गया है। जो गत्ता 70 रुपये में आता था, वो 105 रुपये प्रति किलो, पोलीस्टिक 240-250 रुपये में थी, वो 450 रुपये की आ रही है। हरियाणा सरकार से कई बार मांग की जा चुकी है कि राज्य में रॉ मैटेरियल तैयार करने की दिशा में काम किया जाए, लेकिन अभी इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। एक बार फिर मुख्यमंत्री से मिलकर इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।
- आरएल शर्मा, राज्य प्रधान, हरियाणा फार्मास्युटिकल्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन
कच्चा माल हुआ महंगा
पैरासीटामॉल टेबलेट बनाने का रॉ मैटेरियल (पाउडर) 300 रुपये प्रति किलो आता था, जिसकी कीमत आज 650 रुपये प्रति किलो ग्राम हो चुकी है। ये वो दवा हैं, जो सर्वाधिक बिकती है, बुखार व दर्द आदि में काम आती है। एमाक्सिबिन का कच्चा माल 2000 रुपये प्रति किलो मिलता था, जो अब 3000 रुपये प्रति किलो हो गया है। सिफैक्जिन 8000 रुपये से 13000 रुपये प्रति किलो गया है, इसी तरह अन्य दवाओं का कच्चा माल काफी महंगा हुआ है। जब रॉ मैटेरियल महंगा मिल रहा है तो दवाओं की लागत बढ़ रही है, जिसके कारण दवाओं के दाम भी बढ़ रहे हैं।
- नरेंद्र अरोड़ा, जिला प्रधान, हरियाणा फार्मास्युटिकल्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन करनाल
70 हजार लोगों को रोजगार देता है फार्मा उद्योग
करनाल सहित हरियाणा में करीब 350 छोटी बड़ी दवा बनाने की फैक्टरियां हैं, जो करीब 60 से 70 हजार लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। इनमें से अधिकांश फैक्टरियों के लिए कच्चा माल चीन से ही आता है, जिसके दाम काफी बढ़ चुके हैं।