बासमती और उसकी श्रेणी में आने वाली अन्य किस्मों के धान की खरीद बंद होने से हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई बासमती उत्पादक राज्यों में खलबली मच गई है। इस संबंध में सोमवार को अखिल भारतीय बासमती चावल निर्यात एसोसिएशन के पदाधिकारियों की केंद्रीय वाणिज्य सचिव से बातचीत हुई, जिसमें तात्कालिक तो कोई समाधान नहीं हुआ लेकिन उम्मीद जरूर बंधी है कि आने वाले चार या पांच दिनों में समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन एसोसिएशन ने समाधान होने तक महीन धान की खरीद को निलंबित रखा है।
अखिल भारतीय बासमती चावल निर्यात एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं हरियाणा राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सुशील जैन, महासचिव पंकज गोयल, उपाध्यक्ष सतीश गोयल, संयुक्त सचिव देवेंद्र सिंगला आदि 12 पदाधिकारियों ने सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मिलकर बातचीत की।
बताया गया कि 20 दिन पहले जो वाणिज्य मंत्री ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बातचीत के दौरान निर्यात सीमा को 850 डालर प्रति मीट्रिक टन करने पर विचार करने का भरोसा दिया था। उसकी फाइल अभी संबंधित मंत्रियों के पास है, उस पर विचार हो रहा है।
चूंकि सीजन शुरू हो गया है, इसलिए पहले से तय सीमा 1200 डालर, प्रति टन का पत्र जारी कर दिया गया था। सुशील जैन ने बताया कि केंद्रीय वाणिज्य सचिव से बातचीत सकारात्मक रही है, उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले तीन चार दिनों में 850 डालर प्रति टन वाली सीमा करने पर विचार के बाद उचित निर्णय लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि लेकिन सिर्फ आश्वासन पर भरोसा करना संभव नहीं है, क्योंकि वाणिज्य मंत्री के भरोसा दिलाने के बाद भी 14 अक्तूबर को 1200 डालर प्रति टन निर्यात सीमा का पत्र जारी कर दिया गया है। निर्यातकों ने जो पहले से धान खरीद रखा है, उसका चावल ही निर्यात नहीं हो पा रहा है, तो और धान को कैसे खरीदा जा सकता है।
इसलिए फिलहाल बासमती, उसकी श्रेणी में आने वाली किस्मों जैसे 1509, 1121, 1401, 1718, पीबी-1 आदि महीन धान की किस्मों के धान की खरीद को निलंबित ही रखा जाएगा। मंगलवार को अखिल भारतीय बासमती चावल निर्यात एसोसिएशन के पदाधिकारियों की दिल्ली में फिर बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।