करनाल। सरकार की मंशा आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान करने की हो सकती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है। वीरवार को जिलेभर में आयोजित समाधान शिविरों में महज पांच शिकायतें दर्ज हुईं।
लघु सचिवालय में लगे जिला स्तरीय शिविर में सिर्फ एक व्यक्ति अपनी समस्या लेकर पहुंचा। यही हाल उपमंडलों का भी रहा नीलोखेड़ी और घरौंडा में एक-एक शिकायत दर्ज हुई जबकि असंध में दो लोग पहुंचे। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इंद्री उपमंडल में एक भी शिकायत सामने नहीं आई।
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अब सवाल उठता है कि क्या वास्तव में जिले की समस्याएं समाप्त हो चुकी हैं या फिर लोग इन शिविरों से दूरी बना रहे हैं। पिछले दिनों समाधान शिविर के किए गए लाइव के दौरान भी यह बात सामने आई थी कि यहां शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता है। फरियादियों ने कहा था कि कई बार चक्कर काट चुके हैं लेकिन फिर भी समाधान नहीं हो पाता है। कहीं यही कारण तो नहीं कि अब लोग समाधान शिविर का रुख न कर रहे हों।
वीरवार को शिविर में जो शिकायतें आईं, वे भी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी थीं। बीपीएल कार्ड बनवाने और कटने की परेशानी, बिजली मीटर कनेक्शन और आय सत्यापन जैसे मुद्दे। ये वही समस्याएं हैं जिनसे आम आदमी रोज जूझता है लेकिन उनकी संख्या शिविरों तक सीमित होकर रह जाना कई संकेत देता है। प्रशासन का दावा है कि समाधान शिविरों के जरिये लोगों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी तरीके से निपटारा किया जा रहा है। एसडीएम प्रदीप कुमार का कहना है कि हर शिकायत को गंभीरता से लेकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाता है।