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12वीं के अंकों पर आपत्तियों का होगा निपटारा

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करनाल। सीबीएसई के 12वीं कक्षा के परिणाम में अंकों से असंतुष्ट विद्यार्थियों को अपने स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र के माध्यम से अपनी आपत्तियां बतानी होंगी। ऐसे विद्यार्थी दावा कर सकते हैं जो अंकों से संतुष्ट नहीं हैं या फिर समिति की ओर से अंक गणना में गलती है। साथ ही नई मूल्यांकन नीति को लेकर आपत्ति रखने वाले छात्र भी आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों के लिए चार चरणों की मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।
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परिणाम तैयार करने वाली समिति आपत्तियों के आधार पर परिणाम की जांच करेगी। जांच में परिणाम सही मिलता है और आपत्ति का कोई कारण नहीं निकलता है तो छात्र को समिति की ओर से जवाब भेज दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का रिकार्ड स्कूलों को भी ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीके से अपने पास रखना होगा। बोर्ड ने इस पूरी प्रक्रिया को टाइप-एक श्रेणी में रखा है।
सीबीएसई के अनुसार, यदि छात्रों के मूल्यांकन में कोई गलती पाई जाती है तो परिणाम समिति की ओर से सभी दस्तावेजों के साथ गलती होने व इसके प्रभाव को लेकर स्कूलों को सूचित किया जाएगा। साथ ही स्कूल के प्रधानाचार्य व परिणाम समिति के अध्यक्ष द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय में भी सूचना दी जाएगी। इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय अधिकारी द्वारा इस मामले में निर्णय लेकर जरूरी सुधार किया जाएगा। साथ ही क्षेत्रीय कार्यालयों की ओर से इस तरह के सभी मामलों को मुख्यालय में भी रिपोर्ट देनी होगी। स्कूलों की ओर से क्षेत्रीय कार्यालयों में स्कूल रिक्वेस्ट सबमिशन फार रिसोल्यूशन (एसआरएसआर) के माध्यम से आवेदन भेजा जाएगा। इसके लिए स्कूल लाग-इन करने पर लिंक से आवेदन भेज सकेंगे। आवेदन करते समय स्कूलों को टाइप-2 पर क्लिक करना होगा। इसी तरह अलग आपत्ति पर टाइप-3 और 4 का विकल्प भी दिया गया है।
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14 तक हो जाएगा निपटारा
सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के जिला अध्यक्ष डा. राजन लांबा ने बताया कि परीक्षा अंकों से जुड़े विवाद को निपटाने के लिए सीबीएसई ने एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर दी है। छात्र 9 से 12 अगस्त तक इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। वहीं, बोर्ड की ओर से 14 अगस्त तक विवादों का निपटारा कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई ने जून में टेबुलेशन पालिसी को जारी करते हुए 12वीं के परिणाम का फार्मूला दिया था। इसके तहत 10वीं में बेस्ट तीन विषयों के 30 प्रतिशत, 11वीं कक्षा के 30 प्रतिशत और 12वीं में मिड टर्म, यूनिट व प्री बोर्ड परीक्षा के 40 प्रतिशत अंकों को आधार बनाया गया था। इसके साथ ही बोर्ड ने असंतुष्ट छात्रों को अंकों से जुड़े विवाद को लेकर दावा करने का अवसर देने की बात कही थी।
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