संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल करनाल के चावल उद्योग के लिए बड़ी सुविधा देने जा रहा है। अब करनाल से निर्यात होने वाले बासमती व अन्य किस्म के चावल की अधिक से अधिक ढुलाई मालगाड़ियों से बंदरगाहों तक हो सकेगी। दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई होने वाले चावल को भी मालगाड़ियों से भेजने की योजना रेलवे की प्राथमिकता में शमिल है। बुधवार रेलवे उच्च प्रबंधन और स्थानीय चावल निर्यातकों के बीच कर्ण लेक ओएसिस पर्यटन केंद्र पर इस विषय पर बातचीत हुई। कई घंटे चली वार्ता में निर्यातकों ने मालभाड़े संबंधी कुछ बातें भी अधिकारियों के समक्ष रखी।
उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के एडीआरएम हेमेंद्र कुमार, सीनियर डिवीजनल ऑपरेशन मैनेजर रजनीश श्रीवास्तव व सीनियर डिवीजनल कमर्शियल मैनेजर संदीप गहलोत विशेष विभागीय वाहन से बुधवार को करनाल स्टेशन पहुंचे। स्थानीय स्टेशन अधीक्षक एमएस मीणा भी उनके साथ बैठक में कर्ण लेक गए। रेलवे अधिकारियों ने चावल निर्यातकों के साथ रेलवे की सेवाओं के लिए मंत्रणा की। बातचीत के बिंदुओं में निर्यात गुणवत्ता वाली बासमती चावल की ढुलाई में जो समस्याएं होंगी रेलवे उन्हें दूर करेगा। नियमों में संशोधन की जो भी आवश्यकता होगी वह भी करेंगे। निर्यातकों के लिए रेलवे साफ वैगन की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। समयबद्ध व त्वरित ढुलाई की जाएगी। एक एफएन नंबर रेलवे द्वारा दिया जाएगा जिसकी भारतीय रेलवे में उनका माल व गाड़ी कहां है इसका पता चलेगा। समयबद्ध मांग अनुसार वैगनों की उपलब्धता होगी।
ये प्रस्ताव भी दिया
रेलवे अधिकारियों ने निर्यातकों को प्रस्ताव दिया कि रोल ऑन रोल ऑफ की सुविधा तथा एक वैगन भी यदि बुक करवांगे तो वह भी उपलब्ध करवाया जाएगा। रोल ऑन रोल ऑफ के तहत माल सहित ट्रक को ट्रेन पर चढ़ाकर ले जाया जा सकता है और आगे उसे ट्रेन से उतारकर सड़क मार्ग से बंदरगाह तक ले जाया जा सकता है। मुंद्रा पोर्ट गुज या कांडला पोर्ट के लिए तथा दक्षिण भारत के राज्यों में चावल निर्यातकों को यह सुविधाएं मुहैया होगी। बैठक में बासमती राइस मिल्स एक्सपोर्टर एसोसिएशन की ओर से नाथी राम व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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वर्जन
करनाल से निर्यात किया जाने वाला चावल अभी सड़क मार्ग से जा रहा है। यह चावल बंदरगाहों व दक्षिण भारत में मालगाड़ियों से कैसे जाए इस विषय पर चावल निर्यातकों के साथ बातचीत की है। उनके सुझाव मांगे हैं। चावल निर्यातकों को रेलवे अच्छी सेवा देगा। निर्यातकों को रेलवे ने प्रस्ताव दे दिया है। परिवहन खर्च को लेकर निर्यातकों ने अपनी बात रखी है। उनकी बातों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।
- रजनीश श्रीवास्तव, सीनियर डिवीजनल ऑपरेशन मैनेजर, उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल
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रेलवे की बढ़ेगी आमदनी
करनाल जिले से मालगाड़ियों के माध्यम से अभी भी कई जगह गेहूं व चावल भेजा जाता है। इस ढुलाई से रेलवे विभाग को सालाना करीब 60 करोड़ की आमदन होती है। करनाल में जो माल बाहर से आता है उससे रेलवे को करीब 70 लाख की सालाना आमदनी होती है। सड़क परिवहन के बजाय यदि रेलवे से चावल की ढुलाई बढ़ती है तो रेलवे की आमदन में भी इजाफा होगा।