फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: अब शीतल चंदन की खेती करेगी मालामाल, शोध शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
चंदन की खेती पर सीएसएसआरआई करनाल के वैज्ञानिक तैयार करेंगे खास तकनीक
विज्ञापन


देव शर्मा
करनाल। चंदन की खेती की ओर लोगों का रुझान तो हुआ है लेकिन तकनीक की भारी कमी और पेड़ को तैयार होने में लगने वाले लंबे समय के कारण अपेक्षित रूप से इसकी खेती नहीं हो पा रही है, जबकि चंदन की खेती बेहद फायदेमंद है।अब चंदन के अच्छे और गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करने के लिए केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान में एक परियोजना शुरू हुई है, जिसमें खास तकनीक पर शोध किया जा रहा है, ताकि किसानों को प्रशिक्षण देकर उनकी आमदनी को कईगुना बढ़ाया जा सके।
चंदन एक सदियों से भारतीय संस्कृति से जुड़कर पूजा और तिलक लगाने के काम तो आता ही है, साथ ही सफेद व लाल चंदन के रूप में इसकी लकड़ी का उपयोग मूर्ति, साज-सज्जा की चीजों, हवन करने और अगरबत्ती बनाने के साथ-साथ परफ्यूम और अरोमा थेरेपी आदि के लिए होता है। इसके साथ साथ इसके तेल से कई त्वचा व अन्य कई रोगों की दवाएं भी तैयार होती हैं। दक्षिण भारत में येअधिक पाया जाता है, क्योंकि उत्तर भारत में वर्ष 2001 से पहले चंद की खेती पर प्रतिबंध था। 2001 के बाद केंद्र सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया। किसानों का रुझान चंदन की खेती की ओर बढ़ा भी है लेकिन तकनीक की भारी कमी के कारण इसकी खेती को अपेक्षित गति नहीं मिल रही है।
विज्ञापन

केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि वानिकी) डॉ.राज कुमार ने बताया कि संस्थान के निदेशक डॉ.आरके यादव के मार्गदर्शन में संस्थान में चंदन की खेती पर एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। जिसमें अच्छे और गुणवत्तापरक चंदन के पौधे तैयार करने पर शोध किया जा रहा है। चंदन के पेड़ करीब 12 से 15 साल में तैयार होता है। शोध में ये प्रयास भी किया जाएगा, इसके तैयार होने अवधि को कम किया जा सके। अभी संस्थान में एक एकड़ भूमि में इसकी पौधों पर शोध शुरू किया गया है। चंदन परजीवी पौधा है, इसलिए इस पर शोध चल रहा है कि उसके पास कौन से मेजबान पौधा (खुराक देने वाला पौधा) हो और उसे कितना खाद पानी दिया जाना चाहिए। जिससे चंदन बेहतर खुराक प्राप्त कर सके।
बड़े मुनाफे की खेती
वरिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि वानिकी) डॉ.राज कुमार ने बताया कि चंदन का पेड़ जितना पुराना होगा, उतनी ही उसकी कीमत बढ़ती जाएगी। 15 साल के बाद एक पेड़ की कीमत करीब 70 हजार से दो लाख रुपये तक हो जाती है। ये बेहद लाभकारी खेती है, यदि कोई व्यक्ति 50 पेड़ ही लगाता है तो 15 साल बाद वह एक करोड़ रुपये के हो जाएंगे। औसत आमदनी सवा आठ लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक हो जाएगी। घर में बेटी या बेटा होने पर 20 पौधे भी लगा दिए जाएं तो उनकी शादी का खर्च की चिंता खत्म हो जाएगी।
किसानों की दी जाएगी खास तकनीक
चंदन के पेड़ को तैयार करने की तकनीक पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। दोनों पेड़ों की बीच दूरी कितनी होनी चाहिए, कितना खाद पानी देना चाहिए। चंदन के साथ दूसरी और कौन कौन सी फसलें ली जा सकती है। खास कर कम पानी वाली दलहनी फसलों आदि पर कार्य किया जा रहा है। किसानों को चंदन की खेती की ओर बढ़ना चाहिए, इसे मेड़ पर लगाए, जलभराव नहीं होना चाहिए।
चंदन परजीवी पौधा है
- वरिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि वानिकी) डॉ.राज कुमार ने बताया कि चंदन परजीवी पौधा है, यानी वह खुद अपनी खुराक नहीं लेता है, बल्कि दूसरे पेड़ की जड़ से अपनी खुराक लेता है। जहां चंदन का पौधा होता है, वहां पड़ोस में कोई दूसरा पौधा लगाना होता है, क्योंकि चंदन अपनी जड़ों को पड़ोसी पौधे के जड़ों की ओर बढ़ाकर उसकी जड़ों को अपने से जोड़ लेता है और उसकी खुराक में से ही अपनी खुराक लेने लगता है।
विज्ञापन

-चंदन के पौधे पर संस्थान में प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, जिस पर शोध व तकनीक पर कार्य चल रहा है। किसानों के लिए बड़े मुनाफे की खेती है। कम पानी और कम लागत वाली खेती है। किसानों को खास तकनीक से खेती करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिससे किसान अभी आय को बढ़ा सकें।
डॉ.राज कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि वानिकी), सीएसएसआरआई, करनाल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें