करनाल। शिक्षा निदेशालय ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मिड-डे-मील में दलिया शामिल किया है, लेकिन विभाग की ओर से बच्चों के हित में बनाई गई इस योजना ने स्कूल प्रबंधकों को चिंता में डाल दिया है। क्योंकि जिले के स्कूलों में मिड-डे-मील के लिए न तो आटे की आपूर्ति की जा रही है, न ही दलिया खरीदने के लिए अतिरिक्त बजट है। ऐसे में विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए स्कूल प्रबंधक बच्चों को दलिया कैसे खिलाएं।
जिले के स्कूलों में पिछले कुछ वर्षों से मिड-डे-मील में गेहूं की जगह फोर्टिफाइड आटे की आपूर्ति हो रही है। इसी आटे से खाद्य सामग्री मेन्यू के हिसाब से तैयार करके बच्चों को परोसी जाती है। अब दिक्कत इसलिए आ रही है, क्योंकि विभाग ने डाइट में दलिया, रागी सहित कई अन्य व्यंजनों को शामिल किया है। जिसे तैयार कराने के लिए बजट नहीं बढ़ाया गया है। बजट की स्थिति यह है कि कक्षा एक से पांच तक के लिए 5.45 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से बजट आता है।
जिला स्तरीय मिड-डे-मील की निगरानी समिति के सदस्य दीपक गोस्वामी का कहना है कि इस राशि में से भी 2.33 रुपये गेहूं की पिसाई यानी आटा तैयार करने के नाम पर विभाग काट लेता है। ऐसे में शेष 3.12 रुपये में तो पुरानी डाइट के मसाले और राशन व खाद्य सामग्री जुटाना मुश्किल हो जाता है। अब दलिया कैसे बनवाएं, यह स्कूल प्रबंधकों को समझ नहीं आ रहा है। विदित हो कि जिले में 779 राजकीय स्कूलों के 98 हजार बच्चों को मिड डे मील दिया जाता है। कक्षा एक से 5वीं तक 5.45 रुपये और छठी से आठवीं तक 8.17 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से बजट दिया जाता है। ब्यूरो
हर हित स्टोर से राशन मिलना मुश्किल
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण कुमार निर्माण का कहना है कि विभाग ने मिड डे मील तैयार करने के लिए राशन सामग्री सरकार की ओर से हर हित स्टोर से खरीदने के निर्देश दिए हैं, लेकिन करनाल में हर हित स्टोर कहां-कहां हैं, इसकी जानकारी ही नहीं है। यह निर्णय विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में नहीं है। बजट स्कूलों में कई बार छह माह में मिलता है। यहां सात दिन में भुगतान करने के निर्देश हैं। ऐसे में समय पर भुगतान करना चुनौती होगी। इससे स्टोर संचालक आपूर्ति भी रोक सकते हैं।
सेहत कैसे बनाएं, सरकार बजट भी बढ़ाए
जिला स्तरीय मिड-डे-मील की निगरानी समिति के सदस्य दीपक गोस्वामी का कहना है कि पहले मिड-डे-मील के मेन्यू में 13 डाइट थी, जिसे अब बढ़ाकर 17 कर दिया। विभाग ने डाइट बढ़ाकर बच्चों की सेहत और स्वास्थ्य का ध्यान रखा है, लेकिन इसे तैयार करने के लिए बजट बढ़ाना भी जरूरी है। दलिया, रागी, दही-बेसन के पूड़े तैयार करने के लिए बजट पर्याप्त नहीं है। न ही डाइट को तैयार करने के लिए राशन की मात्रा पर्याप्त रखी है।
मिड-डे-मील में दलिया बनाने के निर्देश तो जारी हुए हैं। दलिया कैसे तैयार हो, इस पर विचार विमर्श किया जा रहा है। फिलहाल स्कूलों में फोर्टिफाइड आटे की आपूर्ति होती है। - सदानंद वत्स, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी