फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा: गेहूं पैदावार का मिला नया लक्ष्य; अब 114 मिलियन टन की ओर बढ़े कदम, किसानों तक पहुंचाए जाएंगे नए बीज

Mon, 02 Oct 2023 09:30 AM IST
नवीन दलाल देव शर्मा, करनाल (हरियाणा)

सार

भारत सरकार ने किसानों और विज्ञानिकों को 114 मिलियन टन गेहूं की पैदावार का नया लक्ष्य दिया है। विज्ञानिकों को इसके लिए अधिक पैदावार वाली नई किस्मों, उच्च गुणवत्तापूर्ण बीज, नई तकनीक को समाहित करते हुए किसानों के खेतों तक पहुंचाना है, किसानों को जागरूक करना है।
विज्ञापन
गेहूं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के वैज्ञानिक एक बार फिर नए लक्ष्य के साथ गेहूं की पैदावार बढ़ाने में जुट गए हैं। पिछले साल का लक्ष्य 112 मिलियन टन हासिल करने के बाद अब केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 के लिए देश की गेहूं पैदावार का नया लक्ष्य (114 मिलियन टन) निर्धारित किया है। इसका खुलासा करते भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं सचिव डेयर डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि हमें नई तकनीक, नई किस्मों के बीज, किसानों तक पहुंचाकर और उन्हें जागरूक कर नए लक्ष्य को पाना है।

विज्ञापन


भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) में करनाल स्थित सभी अनुसंधान संस्थानों के निदेशकों, वैज्ञानिकों और देश के कृषि अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने बीते रोज मंथन किया। इसमें आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत के किसानों, वैज्ञानिकों ने गेहूं की पैदावार में बड़ा काम किया है। इस साल भी 16 नई किस्में रिलीज की गई हैं, जो जलवायु सहनशील हैं, लेकिन अभी नई किस्मों पर अनुसंधान लगातार चल रहा है।

अधिक पैदावार वाली नई किस्म
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने 112 मिलियन टन गेहूं के लक्ष्य को पाने पर आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक सहित सभी वैज्ञानिकों और देश के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि अब भारत सरकार ने 114 मिलियन टन गेहूं की पैदावार का नया लक्ष्य दिया है। हमें इसे चुनौती के रूप में लेना है और इसे हासिल करने के लिए गंभीरता से काम करना है। इसके लिए अधिक पैदावार वाली नई किस्मों, उच्च गुणवत्तापूर्ण बीज, नई तकनीक को समाहित करते हुए किसानों के खेतों तक पहुंचाना है, किसानों को जागरूक करना है। उन्होंने ये भी कहा कि कुछ दिन बाद ही गेहूं की बुवाई शुरू हो जाएगी, प्रयास किया जाए कि किसानों तक गुणवत्तायुक्त, जलवायु सहनशील किस्मों का बीज समय पर पहुंचे।

विज्ञापन

जो भी किस्म निकले, वो जलवायु सहनशील होनी चाहिए

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेश डॉ.ज्ञानेंद्र सिंह से मुखातिब होते हुए वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है, इसलिए गेहूं हो या जौ या फिर कोई फसल, जो किस्म नई निकालें, वह जलवायु सहनशील होनी चाहिए। ऐसी किस्में जो अत्यधिक बारिश, सूखा और अधिक तापमान सहकर भी बेहतर पैदावार दे सकें। जलवायु परिवर्तन पर निकरा परियोजना व कई अन्य तकनीक पर काम हो रहा है। केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई), राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) सहित आईसीएआर के कई संस्थानों पर काफी पहले से ही काम चल रहा है।
विज्ञापन

45 प्रतिशत रकबे में जलवायु सहनशील प्रजातियों से पाया लक्ष्य

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र करनाल के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि एक वक्त था जब देश गेहूं आयात करता था लेकिन अब गेहूं निर्यात किया जा रहा है। पिछले साल केंद्र सरकार ने 112 मिलियन टन लक्ष्य रखा था। जिस तरह का विपरीत मौसम रहा, उससे ये लक्ष्य काफी बड़ा लग रहा था लेकिन ये गर्व की बात है कि हमारी तकनीकियों और जलवायु परिवर्तनशील किस्मों के कारण ही विपरीत मौसम का कोई खास असर फसल की पैदावार पर नहीं पड़ा। पिछले साल देश के 45 प्रतिशत रकबे में जलवायु परिवर्तनशील किस्में बोई गई थी। जिसके परिणाम स्वरूप देश ने बड़ी आसानी से 112 मिलियन टन का लक्ष्य पार कर लिया। ये देश की बड़ी उपलब्धि हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें